एक्सप्रेस-वे के 123 पेड़ अब संजय वन में लेंगे सांस
- एनएचएआई को दिया गया था पेड़ों को शिफ्ट करने का प्रपोजल
- वन विभाग ने दी अनुमति, पीपल और पिलखन के हैं अधिकतर पेड़
मेरठ। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे बनाने के लिए जिन पीपल और पिलखन के 123 पेड़ों को काटा जा रहा था। वे अब वन विभाग की पहल से बच जाएंगे। एक्सप्रेस-वे से ट्रांसप्लांट करके इनको संजय वन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। जहां ये पेड़ दोबारा जिंदगी शुरू करेंगे।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस का काम कई साल से चल रहा है। एक्सप्रेस के बीच में नॉन फारेस्ट लैंड में बहुत से पेड़ आ रहे थे। इन पेड़ों को काटे जाने की अनुमति मिल गई थी। वन विभाग ने इन पेड़ों का सर्वे कराया तो अधिकतर पीपल और पिलखन के निकले। ये पेड़ सात से आठ साल पुराने हैं। वन विभाग ने एनएचएआई से इनकी शिफ्टिंग कराने का प्रपोजल दिया था जिसे एनएचएआई ने स्वीकार कर लिया। डीएफओ अदिति शर्मा ने बताया कि 123 पेड़ों को संजय वन में शिफ्ट किया जाएगा। मुख्य द्वार से आगे पार्क केसामने इनको लगवाया जाएगा। इन पेड़ों की पूरी देखरेख की जाएगी ताकि ये यहां पर अच्छी तरह से फलफूल सकें।
कैसे होता है पेड़ ट्रांसप्लांट
ट्रांसप्लांट में पेड़ की जड़ खोदी जाती है। पहले एक तरफ और फिर बाद में दूसरी तरफ की जड़ को अलग किया जाता है। जड़ों में केमिकल लगाकर उसका प्रत्यारोपण दूसरी जगह किया जाता है। लंबाई और पेड़ की उम्र के हिसाब से गहरा गड्ढ़ा खोदा जाता है। इस तकनीक का सबसे अधिक इस्तेमाल दक्षिण भारत में हुआ है। ट्रांसप्लांट में शिफ्ट किए गए पेड़ आज भी तमाम जगहों पर हरियाली दे रहे हैं। डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कि पीपल और पिलखन जैसे पेड़ आसानी से ट्रांसप्लांट हो जाते हैं।
प्रकिया हो चुकी है
सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बारिश के शुरू होते ही तुरंत इन 123 पेड़ों को शिफ्ट कराकर संजव वन में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। - अदिति शर्मा, डीएफओ