- घर-घर जाकर की जांच तो मिले टीबी के 173 मरीज
- 1799 मरीजों की हुई जांच तो चला टीबी का पता
- 20 से 50 साल के बीच की उम्र वाले ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। टीबी का वार जारी है। हर 11वां मरीज टीबी का बीमार निकला है। जिला क्षय रोग विभाग के 10 से 19 जून तक शहरी और देहात क्षेत्र में घर-घर जाकर कराए गए 1799 मरीजों पर जांच सर्वे में टीबी के 173 नए मरीज मिले हैं। इन मरीजों को जानकारी नहीं थी कि वह टीबी के मरीज हैं। इनका इलाज शुरू कर दिया गया है। इनमें 20-50 साल के बीच की उम्र वाले सबसे ज्यादा हैं। इनमें करीब 65 प्रतिशत पुरुष और 35 फीसदी महिलाएं हैं।
जिला क्षय रोग विभाग का घर-घर टीबी के मरीज तलाशने का अभियान 10 जून को शुरू किया गया था। यह अभियान 19 जून तक चलाया गया। इसके लिए 142 टीमों का गठन किया था। इनमें 30 कर्मचारियों द्वारा सुपरविजन किया गया। 10 मेडिकल ऑफिसरों को नोडल अधिकारी बनाया गया था। इस अभियान का नाम ‘टीबी-फ्री इंडिया’ है। प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोगियों से मुक्त करने के प्रयास के तहत सक्रिय क्षय रोगी अभियान चलाया गया। जिले में पिछले पांच साल में 34 हजार से ज्यादा मरीजों को टीबी की पुष्टि हो चुकी है।
यहां चलाया गया अभियान
मकबरा डिग्गी, केसरगंज, मछेरान, लल्लापुरा, शिवपुरम, जयभीमनगर, कांशीराम कॉलोनी, कालिया गढ़ी, शेरगढ़ी, शिवशक्ति विहार, हर्रा, खिवाई, छुर, पूठ, पुलिस लाइंस, इंचौली, नंगला बट्टू, अब्दुल्लापुर आदि स्थानों पर यह अभियान चलाया गया।
एक मरीज बना सकता है 10-15 को बीमार
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) का अगर एक मरीज इलाज नहीं कराता तो वह 10 से 15 मरीजों को टीबी का शिकार बना सकता है। इससे भी भयावह हालात यह हैं कि व्यक्ति को टीबी हो और उसे इसका पता भी न हो कि वह इस बीमारी का शिकार है और उसकी वजह से और भी लोग टीबी के मरीज हो सकते हैं। इसी लिए अभियान चलाकर घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। नियमित जांच कराने के बाद नियमित दवाएं खाने से बीमारी ठीक हो जाती है। चिंता इस बात की है कि कई मरीज बीच में इलाज छोड़ देते हैं, जो कि गलत तरीका है। इससे बीमारी बढ़ सकती है।
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यह लक्षण दिखें तो कराएं जांच
- दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
- बुखार, भूख न लगना
- रात में पसीना आना
- वजन में लगातार गिरावट
यह है टीबी
टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।