महानगर के भवनों का जीआईएस सर्वे कराने की तैयारी
दस साल पहले भी हुआ था सर्वे, कंपनी ने नहीं सौंपी थी रिपोर्ट
मेरठ। नगर निगम के खाली खजाने को भरने के लिए फिर से जियोग्रॉफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस सर्वे) पर मंथन किया गया। पहले भी एक कंपनी ने सर्वे किया था, लेकिन नगर निगम को अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी। अब सरकार ने ही जीआईएस सर्वे के लिए कंपनी का चयन किया है। कंपनी के अधिकारियों ने बुधवार को नगर निगम पहुंचकर टाउन हॉल में नगरायुक्त और टैक्स विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने टैक्स अधिकारियों से शहर की सीमा का रिकॉर्ड मांगा।
महानगर में सभी भवनों से हाउस टैक्स नहीं लिया जा रहा है। शत प्रतिशत आवासीय और कामर्शियल भवनों पर हाउस टैक्स लगे और टैक्स वसूला जाए। इसको लेकर लेकर पिछले 15 साल से कवायद चल रही है। दस साल पहले भी एक कंपनी ने जीआईएस सर्वे किया था। उसकी एवज में निगम ने कई लाख रुपये भी खर्च किए। लेकिन सच्चाई यह है कि वह कंपनी अपनी जीआईएस रिपोर्ट ही निगम को नहीं दे गयी थी। इसके बाद वर्ल्ड बैंक की तरफ से एक संस्था महानगर में कामर्शियल भवनों का सर्वे करने पहुंची थी। कंपनी ने सर्वे भी किया, लेकिन रिपोर्ट को निगम अधिकारियों ने खारिज कर दिया। कंपनी सर्वे के दौरान हुए खर्च का निगम पर दावा कर रही है। अब यह नई कंपनी जीआईएस सर्वे करने पहुंच गयी है। बुधवार को टाउन हॉल में कंपनी के अधिकारियों ने नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा, हाउस टैक्स विभाग के सभी कर निर्धारण अधिकारी और टैक्स इंस्पेक्टरोें के साथ बैठक की। शहर में आवासीय और कामर्शियल भवनों की सूची और निगम सीमा का नक्शा मांग लिया है। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान का कहना है कि निगम की आय बढ़ाने के लिए सभी भवनों पर हाउस टैक्स लगेगा। इसके लिए जीआईएस सर्वे होना जरूरी है।