योग और आयुर्वेद में रहे श्रेष्ठ, धरोहर संजो नहीं पाए
मेरठ। योग एवं आयुर्वेद हमारी श्रेष्ठता का परिचायक हैं। प्राचीन काल में हम विभिन्न श्रेत्रों मेें दुनिया का नेतृत्व करते थे। लेकिन हम अपनी इस धरोहर को संजोकर नहीं रख पाए। आज जब हमें इस महत्व का ज्ञान हुआ तो पूरी दुनिया में योग का परचम लहरा रहा है।
यह बात अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में सीसीएसयू कैंपस में क्रीड़ा भारती के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय योग शिविर के तीसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु स्वामी कर्मवीर महाराज ने कही। शिविर के उद्घाटन में स्वामी कर्मवीर महाराज के साथ क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय महामंत्री राज चौधरी, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला और प्रो. वीर सिंह शामिल रहे। शिविर में स्वामी जी ने कई योग क्रियाएं संपन्न कराईं। इनमें मुख्य रुप से मृदु कृपालभाति, मृदु भृतशिका, मृदु अनुलोम विलोम, कपोत उज्जयी, शलभ आसन, मंडूक आसन, अग्निशार क्रिया शामिल रहीं। अंत में योग निद्रा कराते हुए हास्य आसन के साथ तीसरे दिन के योग शिविर की समाप्ति की।
स्वामी जी ने बताया कि मंगलवार को विशेष प्रकार की योग क्रिया कराई जाएगी, जिसे शंख प्रक्षालन कहा जाता हैै। यह क्रिया विभिन्न प्रकार की पेट की बीमारियों से छुटकारा दिलाती है। स्वामी कर्मवीर महाराज रोजाना शाम चार बजे से छह बजे तक जीवामृत जैविक योग एवं आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, मंगल पांडे नगर में मरीजों को निशुल्क चिकित्सीय परामर्श भी दे रहे हैं।
योग शिविर में आए अतिथियों एवं शहर के गणमान्य लोगों का स्वागत कार्यक्रम के संयोजक जगत सिंह दौसा ने किया। संचालन डॉ. प्रशांत कुमार और राजन कुमार ने किया। योग शिविर में प्रो. अशोक चौबे, प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. आलोक कुमार, डॉ. संदीप त्यागी, अभिषेक, रोबिन सहित कैंपस के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र, गणमान्य लोगों के साथ-साथ काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।