अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण न करने वालों अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग अभियान चला रहा है। बुधवार तक स्वास्थ्य विभाग ने 48 अस्पताल और नर्सिंग होम की जांच की। इनमें से सभी के पास बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण का लाइसेंस मिला, लेकिन उसे निस्तारित करने में खामियां दिखाई दीं। अब स्वास्थ्य विभाग कार्यशाला के जरिए इसमें सुधार कराने की तैयारी कर रहा है।
अभियान के तहत करीब 272 अस्पताल, नर्सिंग होम और 700 से ज्यादा क्लीनिकों की जांच की जाएगी। मेरठ में दो अधिकृत कंपनियां बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करती हैं। इनमें एक सिनर्जी वेस्ट और दूसरा मेडिकल केयर है। स्वास्थ्य विभाग 17 बिंदुओं पर जांच कर रहा है। इसके अलावा निस्तारण के लिए कंपनियों से अनुबंध किया हुआ है या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि अभी तक सारे अनुबंध वाले निकले हैं। कुछ खामियां हैं, जिन्हें दूर कराने के लिए कहा गया है। 48 अस्पतालों को इस संबंध में नोटिस दिए गए हैं, जिनमें संजीवनी, सर्वहित, उपकार, प्रकाश, लाइन लाइन, परेम, जगदंबा, दिव्य ज्योति, संतोष अस्पताल आदि शामिल हैं।
इन तीन बिंदुओं पर नहीं उतरे खरे
- एक संस्थान को छोड़कर किसी भी अन्य संस्थान में यूूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से वायु एवं जल का सहमति पत्र प्राप्त नहीं किया गया।
- किसी भी संस्थान द्वारा साल 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी नहीं भेजी गई है।
- किसी भी संस्थान द्वारा पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड नहीं की गई है।
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तीन तरह से किया जाता है अलग
बायो मेडिकल कचरे को सामान्य कूड़े या घरों से निकलने वाले कूड़े की तुलना में अलग तरह से इकट्ठा किया जाता है। मेडिकल कचरे को तीन तरह से अलग किया जाता है। शरीर के अंगों का खून, दूषित रुई व पट्टी को पीले बॉक्स में डाला जाता है। ब्लड बैग, सिरिंज को लाल रंग के बॉक्स में और कांच की बोतल व स्लाइड के लिए नीले रंग का बॉक्स होता है। इस कूड़े के लिए निर्धारित व्यवस्था होने के बावजूद कर्मचारी गंभीरता नहीं बरतते हैं।