कैसे बुझेगी आग
मेडिकल में आग बुझाने का प्रोजेक्ट ठप, जंग खा रहे पाइप
- 30 सितंबर 2018 को होना था पूरा, अब तक भी अधूरा
- 10 जून 2016 को शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
- 4.82 करोड़ रुपये का था प्रोजेक्ट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में आग बुझाने का प्रोजेक्ट ठप पड़ा है। 10 जून 2016 को शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 30 सितंबर 2018 तक पूरा होना था, लेकिन अभी तक सिर्फ 16 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में आग से सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट की लागत चार करोड़ 81 लाख 94 हजार रुपये है। एक करोड़ 92 लाख 77 हजार रुपये की धनराशि अवमुक्त कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कार्य बीच अधूरा है। मेडिकल कॉलेज में हर साल 30 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं। इसके अलावा हर रोज तीन हजार के करीब मरीज ओपीडी में आते हैं। ओपीडी में आने वाली संख्या सालभर में साढ़ छह लाख से ज्यादा हो जाती है। इनके अलावा तीमारदार, मेडिकल स्टूडेंट्स, फैक्लटी और अन्य स्टाफ भी यहां रहता है।
मेडिकल कॉलेज केप्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि फायर फाइटिंग का कार्य कार्यदायी संस्था द्वारा निष्पादित न किए जाने के कारण कार्य रुका हुआ है। इसे शुरू कराने की कोशिश की जा रही है।
कुछ पाइपों को लगा जंग, कई चोरी
इस प्रोजेक्ट के तहत पूरे कॉलेज व अस्पताल को कवर किया जाना था। प्रोजेक्ट के तहत काफी संख्या में पाइप मंगाए गए थे, लेकिन आधी पाइपलाइन बिछाकर ही इसे बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया। खुले में पड़े पाइपों में जंग लग चुका है, जबकि कई पाइप चोरी भी हो गए हैं। इतने बड़े प्रोजेक्ट पर कॉलेज और अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। यहां बिजली की वायरिंग बेहद पुरानी और जर्जर हैं। इस कॉलेज में फिलहाल आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी हैं।
1966 के बाद नहीं हुआ रीवायरिंग का काम
मेडिकल कॉलेज 155 एकड़ में फैला है। यहां सिर्फ 200 अग्निशमक यंत्र ही हैं। इसमें करीब 150 सिलेंडर एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक व पुरानी बिल्डिंग में लगे हैं, जबकि करीब 50 नई इमरजेंसी में। कई जगह फायर अलार्म भी खराब हैं। 1966 केबाद से यहां रीवायरिंग का काम नहीं हुआ है, जबकि कई विभागों में पुराना लकड़ी का फर्नीचर आदि आसानी से जलने वाला सामान इधर-उधर पड़ा है।