फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मामला एसआईटी और कोर्ट में, जांच समिति ने दो को दे दी क्लीनचिट

विज्ञापन
विज्ञापन
मामला एसआईटी और कोर्ट में, जांच समिति ने दो कर्मचारियों को दी क्लीन चिट
विज्ञापन

एमबीबीएस कॉपी घोटाला:
- सीसीएसयू में एमबीबीएस की कॉपियां बदले जाने का अमर उजाला ने किया था भंडाफोड़
- एसटीएफ ने आठ आरोपी भेजे थे जेल, दो कर्मचारी चल रहे एक साल से ज्यादा से सस्पेंड
- तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति ने दोनों कर्मचारियों को दी क्लीन चिट
- लखनऊ एसआईटी अलग से कर रही है जांच तो कोर्ट में भी चल रहा अभी मामला
- सीसीएसयू की कार्य परिषद की बैठक में नहीं मानी गई क्लीन चिट, दोनों आरोपी रहेंगे सस्पेंड
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस में एमबीबीएस की कॉपियां बदले जाने के मामले में सस्पेंड चल रहे दो कर्मचारियों का मामला जहां अभी तक एसआईटी लखनऊ और कोर्ट में चल रहा है। वहीं, जांच समिति ने उनको क्लीन चिट दे दी। शनिवार को सीसीएसयू कार्य परिषद की बैठक में क्लीन चिट को नहीं मानते हुए दोबारा से जांच कराने पर विचार किया जा रहा है। स्पष्ट कर दिया गया कि एसआईटी की जांच पूरी नहीं होने तक दोनों कर्मचारी बहाल नहीं किए जाएंगे।
पांच फरवरी 2018 से मेरठ मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर के गर्वमेंट मेडिकल कॉलेज, पिलखुवा के रामा मेडिकल कॉलेज, हापुड़ के सरस्वती मेडिकल कॉलेज और मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के एमबीएसी सेकेंड और थर्ड ईयर की परीक्षाएं चल रहीं थीं। पेपर होने के बाद इन कॉलेजों की मूल्यांकन के लिए कॉपियां रोजाना विवि के आंसर बुक सेंटर पर आ रहीं थीं। एसटीएफ मेरठ की टीम को सूचना मिली कि एक गिरोह एमबीबीएस की परीक्षा में छात्रों को पास कराने के लिए बड़ा खेल कर रहा है। टीम इसको लेकर जांच में जुटी थी। 17 मार्च 2018 को अमर उजाला ने इसका भंडाफोड़ किया तो 18 मार्च को एसटीएफ ने छात्र नेता कविराज को गिरफ्तार कर यूनिवर्सिटी में कॉपियां बदले जाने का खेल उजागर किया था।
विज्ञापन

कविराज ने खुलासा किया था वो यूनिवर्सिटी के कर्मचारी पवन कुमार, संदीप और कपिल के साथ मिलकर एमबीबीएस की कॉपियां बाहर से लिखवाने के बाद उन्हें उत्तर पुस्तिका कक्ष में रखीं कॉपियों से बदल देता था। जिसके बाद एसटीएफ ने पवन कुमार, संदीप और कपिल को भी गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों ने कुबूल किया था कि वे चार साल से यूनिवर्सिटी में कॉपियां बदलने का खेल कर रहे थे। आरोपियों से पूछताछ में यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड कर्मचारी चंद्रप्रकाश और सलेखचंद्र एवं हरियाणा निवासी संदीप के नाम भी सामने आए थे। एसटीएफ ने इस प्रकरण में आठ लोगों को जेल भेजा था।
तीन सदस्यीय जांच समिति हुई थी गठित
कुलपति ने दो कर्मचारियों सलेखचंद्र और पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया था। दो कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई थी। इस मामले में कुलपति ने हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, तत्कालीन रजिस्ट्रार और प्रोफेसर की उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। 13 माह बाद समिति की रिपोर्ट का लिफाफा कार्य परिषद की बैठक में खुला तो सभी हैरान रह गए।
विज्ञापन

कोर्ट से ऊपर नहीं हो सकती समिति
एकतरफ जहां इस मामले की जांच अभी तक लखनऊ एसआईटी में चल रही है, प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन है। वहीं, समिति की रिपोर्ट में दोनों आरोपी कर्मचारियों की संलिप्तता के सुबूत नहीं मिलने की बात कही है। मामले की गंभीरता और एसआईटी में प्रकरण होने के चलते कार्य परिषद की बैठक में इस पूरी रिपोर्ट को अभी नहीं माना गया है। स्पष्ट कहा गया है कि समिति कोर्ट से ऊपर नहीं हो सकती। विवि इसको लेकर दूसरी जांच समिति गठित कर सकता है। ऐसे में दोनों कर्मचारी सलेखचंद्र और पवन कुमार अभी सस्पेंड ही रहेंगे।
अभी कोई निर्णय नहीं
एसआईटी की जांच अभी चल रही है, ऐसे में जांच समिति की रिपोर्ट पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। -धीरेंद्र कुमार वर्मा, रजिस्ट्रार सीसीएसयू
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें