सफाई पर गंभीर नहीं अधिकारी, कैसे दूर होगी ‘बीमारी’
- गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड पर दो साल बाद भी शुरू नहीं हुआ कूड़ा निस्तारण प्लांट
- शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, गंदगी के कारण लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर पिछड़ता नजर आ रहा है। कूड़े के ढेर, डंपिंग ग्राउंड पर कूड़े का निस्तारण न होने के कारण शहर गंदे शहरों में शामिल होने की कगार पर है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण सर्वेक्षण के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है।
शहर से प्रतिदिन एक हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। शहर में सफाई के लिए स्थायी और अस्थायी लगभग तीन हजार सफाई कर्मचारी हैं। वहीं नगर निगम ने दो साल पहले शहर की जनता को कूड़ा निस्तारण प्लांट का सपना दिखाया था। इसके लिए गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा निस्तारण प्लांट का भूमि पूजन भी किया गया था। उस समय छह माह में400 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण का प्लांट लगाए जाने की बात कही गई थी। तब जनता को लगा था कि कूड़े और बदबू से निजात मिलेगी, लेकिन अब तक कूड़ा निस्तारण प्लांट केवल फाइलों में ही चल रहा है। कूड़ा निस्तारण प्लांट का मामला हाईकोर्ट में है।
जनता की भी है जिम्मेदारी
स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए सफाई कर्मचारियों के साथ शहर की जनता की भी बड़ी जिम्मेदारी है। यदि शहर की जनता अपने घर के कूड़े को घर के बाहर सड़क पर डालने की बजाय डस्टबिन में रखे और उसको उचित स्थानों पर रखे डस्टबिन या डोर टू डोर कूड़ा लेने आने वाली गाड़ियों में ही डाले तो शहर स्वच्छ शहरों में शामिल हो जाएगा।
ये हैं स्वच्छता सर्वेक्षण के बिंदु
- शहर के मुख्य मार्ग और सभी गलियों में प्रतिदिन दो टाइम सफाई होनी चाहिए।
- सभी डिवाइडर मार्गों की रात्रि में होनी चाहिए सफाई।
- सिल्ट से मुक्त होेने चाहिए शहर के नाले।
- सभी वार्डों में सफाई कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी लगे।
- खुले में नहीं होने चाहिए खत्ते।
- हर घर में होना चाहिए गीले और सूखे कूड़े के लिए डस्टबिन।
- हर घर से डोर टू डोर उठना चाहिए कूड़ा।
- कूड़े का होना चाहिए निस्तारण।
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कोर्ट के आदेश का इंतजार
फिलहाल कूड़ा निस्तारण प्लांट का मामला न्यायालय में अटका हुआ है। न्यायालय के निर्णय के बाद ही प्लांट लग पाएगा। यह बात सही है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में कूड़ा निस्तारण बड़ा बिंदु है। इसके आधार पर स्वच्छता के अंक मिलने हैं। इसके बाद भी हम शहर में स्वच्छता में बदलाव का प्रयास कर रहे हैं। -डॉ. गजेंद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी