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लखनऊ तक पहुंची फर्जी गन्ना सर्वेक्षण की गूंज

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- भीषण गर्मी में खेतों पर जाकर सर्वे करने से कतरा रहे सर्वे कर्मी
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- प्रधान के यहां बैठकर किसानों से लिए जा रहे घोषणापत्र, पिछले साल के सर्वे को देखकर घटत-बढ़त की हो रही शिकायत
- गन्ना आयुक्त के निर्देश पर उप गन्ना आयुक्त अलर्ट, अब तक हुए सर्वे की कराई जाएगी क्रास चेकिंग

मेरठ। भीषण गर्मी में खेतों पर जाने की बजाय पिछले रिकॉर्ड में हेरफेर कर गन्ना सर्वेक्षण करने की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। गन्ना आयुक्त के निर्देश पर अलर्ट हुए उप गन्ना आयुक्त अब तक हुए सर्वे की समीक्षा करेंगे।
गन्ना पेराई सत्र 2019-20 के लिए 5 मई से शुरू हुआ गन्ना सर्वेक्षण 30 जून तक किया जाना है। जीपीएस तकनीक से हो रहे सर्वे को गन्ना विभाग और शुगर मिलों की टीम मिलकर कर रही है। दिशा निर्देशों के मुताबिक सभी टीमों को खेतों पर जाकर गन्ना सर्वे करने और मौके पर ही किसानों को खेत की माप की पर्ची दी जानी है। इसके साथ ही किसानों से जमीन की खतौनी और उस पर खड़े गन्ने के रकबे का घोषणा पत्र लिया जाना है, लेकिन भीषण गर्मी से बिलबिला रही सर्वे टीम पर फर्जी सर्वे के आरोप लगने शुरू हो गए है। बताया जा रहा है कि कुछ टीम गांव में प्रधान के यहां बैठकर पिछले सर्वे के मुताबिक ही कागजों को भरने में लगी है। कुछ किसानों की शिकायत पर प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने मामले को गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह अलर्ट हो गए है। हरपाल सिंह ने बताया कि गन्ना सर्वे जीपीएस से कराया जा रहा है। बिना खेत पर जाए यह पूरा नहीं हो सकता है। गूगल मैप से इसका मिलान होना है। बृहस्पतिवार को वे अब तक हुए गन्ना सर्वे की समीक्षा करेंगे। अगर कोई टीम फर्जीवाड़ा करने में लगी है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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30 जून तक पूरा होना है सर्वे
हरपाल सिंह ने बताया कि पांच मई से शुरू हुए गन्ना सर्वेक्षण को 30 जून तक पूरा करना है। अब तक हुए सर्वे की प्रगति ठीक चल रही है। सर्वे में लगी टीमों से रोजाना किए जा रहे सर्वे की पूरी रिपोर्ट ली जा रही है। मंडल के सभी जिला गन्ना अधिकारियों से निगरानी कराई जा रही है।
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