तालाब फिर बनेंगी परेशानी की वजह
खरखौदा। कस्बे में तालाब अतिक्रमण होने की वजह से ओवर फ्लो हो रहे हैं। जिस कारण हल्की बरसात होते ही निचले स्थानों पर जलभराव हो जाता है। खरखौदा नगर पंचायत को आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद भी कस्बे की जल निकासी की समस्या का निस्तारण नहीं हो सका है। क्षेत्रीय विधायक इस मामले में विधानसभा में भी प्रश्न उठा चुके हैं।
कस्बा खरखौदा की आबादी करीब 15.5 हजार है। यहां रिकार्ड के हिसाब से करीब 20 तालाब हैं। इनमें से मौके पर करीब 8 तालाब लुप्त हो चुके हैं। अब केवल 12 तालाब बचे हैं। इनमें से एक भी तालाब कब्जा मुक्त नहीं है। वहीं, कई वर्षों से इनकी सफाई नहीं हो पाई है। सभी तालाब सिल्ट से अटे पड़े हैं। हर वर्ष थोड़ी सी बरसात में निचले इलाकों में बने मकान जलमग्न हो जाते हैं। खासपुर रोड करीब एक किलोमीटर तक जलमग्न हो जाती है। गंदा पानी मुस्लिम समुदाय के कब्रिस्तान एवं हिंदू समुदाय के श्मशान में भी भर जाता है। दोनों समुदायों द्वारा कई बार मांग करने पर एवं जलमग्न हुए मकान स्वामियों की मांग पर एक वर्ष पहले नगर पंचायत में जल निकासी के लिए प्रस्ताव रखा गया था। तालाबों की सफाई नहीं होने के कारण नगर पंचायत द्वारा दो तरह से पानी का समाधान हो सकता है। पहला खरखौदा कस्बे से मोहिउद्दीनपुर रोड के किनारे पर नाले का निर्माण कर उक्त पानी को गांव धनतला में नाले में छोड़ा जाए। दूसरा उलधन मार्ग पर नगर पंचायत भूमि है उसमें तालाब का निर्माण कराया जाए। लागत के हिसाब से गांव धनतला तक नाले का निर्माण कराकर वहां मौजूद नाले में पानी छोड़ने का प्रस्ताव रखा गया। खरखौदा नगर पंचायत को आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद किठौर विधायक सत्यवीर त्यागी ने भी पिछले वर्ष विधानसभा ने खरखौदा की जल निकासी के लिए प्रश्न रखा था। जिसमें तुरंत ही इसके निस्तारण का जिम्मा जल निगम को दिया गया था। कई करोड़ की लागत से बनने वाले करीब पांच किलोमीटर के नाले के लिए जल निगम ने सर्वे भी किया था। जल निगम ने सर्वे के नाम पर नगर पंचायत से नौ लाख रुपये की मांग की। हालांकि एक वर्ष बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बरसात को लेकर फिर चिंता
कस्बे से खासपुर को जाने वाला मार्ग बरसात के दौरान जल मग्न हो जाता है। जिससे इस मार्ग से आने वाले करीब दर्जन भर गांवों के राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, जिन लोगों के मकानों में पानी भर जाता है। उनके चहरे पर भी चिंता की लकीरे पड़ी हुई हैं। एक वर्ष बाद भी इस समस्या का निस्तारण नहीं हुआ है।
जल निगम ने एस्टीमेट शुल्क के लिए रकम की मांग की है। अभी जल्दी में ही वह यहां तैनात हुए हैं। यह कार्य कहां तक चला इसके बारे में जानकारी की जाएगी। -सुरेंद्र कुमार सुमन, जेई जल निगम।
खरखौदा की जल निकासी की समस्या पुरानी है। इसके लिए वह विधानसभा में भी प्रश्न उठा चुके हैं। मामला कहां पर रुका हुआ है इसकी जानकारी की जाएगी।-सत्यवीर त्यागी, विधायक किठौर
यह कार्य बड़ा है। नगर पंचायत इतना पैसा खर्च नहीं कर सकती है। इस कार्य को जल निगम की देख रहा है। शशिप्रभा चौधरी, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत खरखौदा