जैन धर्म शाश्वत धर्म : मुनिश्री
हस्तिनापुर। दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर हस्तिनापुर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान में जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक हुआ।
तत्पश्चात मंगलवार की शांतिधारा करने का सौभाग्य अजित प्रसाद, अनिल कुमार, त्रिशला जैन, सीमा, मधु को प्राप्त हुआ। मुनि भव्य भूषण जी महाराज अपने मंगल प्रवचनों में धर्म सभा में कहा कि 9वें तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान तक जैन धर्म की धर्म प्रभावना लगातार होती रही। किन्तु शीतलनाथ भगवान के शासन काल से 15वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान के शासन काल के मध्य कई बार जैन धर्म की हानि हुई। जैन धर्म अनादि धर्म अनिधन धर्म है। इसके प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हुए हैं। उन्होंने षटकर्म का उपदेश दे करके प्राणियों को जीवन निर्वाह करने की शिक्षा दी। इस धर्म के अन्तिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी हैं। जिन्होंने अंहिसा, सत्य, अस्तेय का पाठ पढ़ाया। सायंकालीन संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के भजनों पर भक्ति की। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक प्रश्नमंच, प्रतियोगिता एवं वर्ग पहेली प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। जिसका संचालन बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने किया। समस्त कार्यक्रम में क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद कुमार, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष सतेंद्र जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, जितेंद्र जैन, अभय कुमार, अतुल जैन, नवीन कुमार, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उप प्रबंधक अशोक कुमार, उमेश जैन, अतुल जैन, मणिचंद, कमल, नवनीत जैन आदि का सहयोग रहा।