आरोप तो यह भी रहे कि जलकल विभाग ने पुराने मॉडल की गाड़ी के चेसिस खरीदे, जिनको छुपाने के लिए सहारनपुर भेज दिया। छह गाड़ियों के ऊपर सीवर टैंक बनाने में एक साल से अधिक समय लगाया गया। अनेक बार नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने जलकल विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।
उसका परिणाम यह हुआ कि सुनील सिंहल सेवानिवृत्ति से एक माह पहले ही सहारनपुर से सीवर जेटिंग मशीन की आपूर्ति करा पाए। मशीन के मेरठ पहुंचने पर टेस्टिंग के दौरान भी उनकी गुणवत्ता पर उंगली उठी थी। लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसका परिणाम अब सामने आ रहा है। सीवर जेटिंग मशीन की गुणवत्ता खराब है। नगर निगम को चूना लगाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी गई।
जलकल विभाग ने दो दिन पहले नौचंदी क्षेत्र में सीवर साफ करने के लिए छह में से दो मशीनें भेजीं, जो मौके पर काम ही नहीं कर पाईं। क्षेत्रीय पार्षद गफ्फार अहमद का कहना है कि चालक ने मशीन चलाने का काफी प्रयास किया, लेकिन पंप ने काम नहीं किया। दोनों ही नई मशीनें खराब निकलीं। आगामी बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। खराब मशीनों पर खर्च किए गए धन की रिकवरी जलकल विभाग के अधिकारियों से की जानी चाहिए।
यह बात सही है कि सीवर जेटिंग मशीनें ठीक से नहीं चल पा रही हैं। हमने कंपनी वालों को बुलाया है। अगर सभी मशीनें ठीक से नहीं चलेंगी, तो हम पेमेंट की संस्तुति नहीं करेंगे। मशीनों का कई बार ट्रायल हो चुका है। लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। - सुनील कुमार, सहायक अभियंता