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साल भर नहीं ली सुध, अब तटबंध के लिए अफसर पहुंचे खुद

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साल भर नहीं ली सुध, अब तटबंध के लिए अफसर पहुंचे खुद
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मवाना। खादर क्षेत्र में पिछले वर्ष आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त तटबंध की प्रशासन को आखिरकार याद आ ही गई। एडीएम वित्त एवं राजस्व के नेतृत्व में शनिवार को एसडीएम एवं तहसीलदार ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ तटबंध की मरम्मत कराने को लेकर निरीक्षण किया। वहीं, तटबंध को मानसून आने से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए। जल्द ही सिंचाई विभाग तटबंध में लगने वाले सामान का एस्टीमेट बनाकर प्रशासन को सौंपेगा ।
बताते चलें पिछले वर्ष खादर क्षेत्र में आई बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई थी। इससे 19 गांव प्रभावित हुए थे। गांवों में गंगा का पानी भर जाने से गन्ना, ज्वार, धान, चारा आदि की फसलें बर्बाद हो गई थीं। यही नहीं ग्रामीणों को गांव खाली कर हस्तिनापुर में शिविरों में रहना पड़ा था। हर साल जुलाई एवं अगस्त में ऋषिकेष एवं हरिद्वार से पानी छोड़े जाने से खादर क्षेत्र में बाढ़ तबाही मचाती है परंतु इसके बाद भी सरकार एवं प्रशासन ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। हर साल पक्का तटबंध बनाने की फाइल बाढ़ के दौरान चलाई जाती है, लेकिन हालात सामान्य होने के बाद फाइल सरकारी कार्यालयों में धूल चाटती रहती है। पिछले वर्ष भी 80 करोड़ की लागत से पक्का तटबंध बनाए जाने को लेकर फाइल चलाई गई थी, लेकिन साल भर बीतने के बाद भी प्रस्ताव पास नहीं हो सका है। एक वर्ष बीतने के बाद प्रशासन को दोबारा तटबंध की याद आई और शनिवार को एडीएम वित्त सुभाष प्रजापति के नेतृत्व में एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव तहसीलदार अशोक कुमार गुप्ता, लेखपाल व सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ तटबंध पर पहुंचे। यहां उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द तटबंध दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इस पर सिंचाई विभाग जल्द एस्टीमेट बनाकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेगा। बताया कि यहां 5 हजार बल्लियों के सहारे 80 ठोकरे बनाई जाएंगी। जिससे ऋषिकेश एवं हरिद्वार से पानी छोड़े जाने के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने पर तटबंध न टूटे। एसडीम मवाना अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जल्द ही तटबंध दुरुस्त करा दिया जाएगा।
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अस्थायी तटबंध के भरोसे ग्रामीण
खादर क्षेत्र के 19 गांव के ग्रामीणों को इस बार भी अस्थायी तटबंध के भरोसे ही रहना होगा। हर साल बाढ़ के दौरान लाखों-करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो जाती है। ग्रामीणों को घर से बेघर होना पड़ता है। यही नहीं बाढ़ के कारण सरकार को भी तटबंध दुरुस्त कराने के लिए हर साल लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। फसल बर्बाद होने पर किसानों को लाखों रुपये मुआवजा देना पड़ता है। इसके बावजूद आज तक तटबंध बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। जिस कारण ग्रामीणों में रोष है।
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संत बाबा भूरी वाले करा रहे तटबंध निर्माण
खादर के किसानों को कटान से बचाने के लिए लगभग एक दशक पहले संत बाबा भूरी वालों ने तटबंध का निर्माण कराया था। बीते वर्ष तटबंध क्षतिग्रस्त होने पर उनके नेतृत्व में इसको बचाने का भरसक प्रयास किया गया था। बीते तीन माह से लगातार गंगा किनारे पर इनके नेतृत्व में तटबंध बनाने का कार्य चल रहा है। यह लगभग तीन किमी. तैयार हो चुका है। लाखों रुपये का खर्च प्रतिदिन आ रहा है। जबकि प्रशासनिक अधिकारी वहां अब स्थिति का जायजा लेने पहुंचे हैं।
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