पीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं
बहसूमा। क्षेत्र में नवजात शिशुओं का इलाज रामभरोसे है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण बेहतर इलाज की व्यवस्था नहीं है। लिहाजा बच्चों का उपचार निजी चिकित्सकों से कराने को विवश हैं।
नवजात शिशुओं के लिए कस्बा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई सुविधा नहीं है। खासकर संसाधनों के साथ बाल रोग विशेषज्ञ की कमी लोगों को काफी अखर रही है। यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ का पद विगत कई वर्षों से रिक्त है। ऐसे में बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था निजी चिकित्सकों पर निर्भर है। बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने से अस्पताल में शिशुओं के उपचार से जुडे़ आधुनिक उपकरणों तक की खरीद नहीं की जा सकी है।
वैसे तो हर पीएचसी व सीएचसी में प्रसव की सुविधा है। इसके बावजूद नवजात शिशुओं के इलाज की कोई मुक्कमल सुविधा नहीं है। प्रसव के बाद अक्सर बच्चे बीमारियों की जद में आ जाते हैं। शरीर का तापक्रम बिगड़ना, पीलिया की शिकायत होना आम है। इन परिस्थितियों में फोटोथेरपी और अन्य सुविधा न होने से शिशुओं के इलाज में काफी कठिनाई होती है। वहीं, लोगों को शिशुओं के इलाज के लिए निजी चिकित्सकों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी राहुल वर्मा का कहना है कि स्थानीय स्तर से बाल रोग विशेषज्ञ की कमी को लेकर कई बार सीएमओ को पत्र लिख चुके हैं। इसके बावजूद पूरे जिले में चिकित्सकों की कमी है। इसके चलते यहां बाल रोग की तैनाती नहीं हो सकी है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था हावी
कस्बा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूल सुविधाओं से वंचित है। इस केंद्र पर आसपास के दर्जन भर से अधिक गांवों के लोग निर्भर हैं। केंद्र पर न तो जेनरेटर की सुविधा है और न ही सबमर्सिबल उपलब्ध है। जिस कारण परिसर में लगे हैंडपंप पर ही निर्भर होना पड़ रहा है। केंद्र प्रभारी डॉ. रक्षित सिंह का कहना है कि केंद्र पर टेस्ट की व्यवस्था भी नहीं है। सामान्य जांच जैसे ब्लड टेस्ट के लिए मरीजों को सीएचसी हस्तिनापुर भेजना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यहां औसतन 90 रोगी पहुंचते हैं।