मौत की गंगनहर पर पीडब्ल्यूडी खामोश
- 16 किमी दायरे में लगे क्रास बैरियर, 26 किमी में नहीं सुरक्षा के इंतजाम
- हाईटगेज भी नहीं लगवा पाया विभाग, भारी वाहन भी हैं हादसे का सबब
- दिसंबर से मई तक गंगनहर में डूबने से हो चुकी है 24 लोगों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
बीते छह माह में गंगनहर में गिरकर डूबने से 24 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं करा रहा है। हालात ये हैं कि कांवड़ मार्ग पर नहर मौत की गंगनहर बनती दिखाई दे रही है। एमडीए, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग और पुलिस सभी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हादसा होने के बाद सभी विभाग नहर की पटरी पर सुरक्षा की योजना बनाते हैं, लेकिन घटना के 15 दिन बाद ही दावे हवा में उड़ जाते हैं। हाल में हुए दो बड़े हादसों के बाद अधिकारी हरकत में दिखे, लेकिन सुरक्षा कें संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।
नहर की 26 किमी पटरी असुरक्षित
मेरठ परिक्षेत्र में यानी मुजफ्फरनगर सीमा से गाजियाबाद सीमा के बीच नहर पटरी की लंबाई करीब 42 किलो मीटर है। नहर पटरी पर रोड बनाने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। इसको कांवड़ मार्ग के नाम से जाना जाता है। मूलरूप से इसका निर्माण कांवड़ियों के लिए किया गया था, लेकिन अब हलके और भारी वाहन भी दौड़ने लगे हैं। इसके बावजूद जानी नहर पुल से मुजफ्फरनगर सीमा तक 26 किमी कांवड़ मार्ग पूरी तरह असुरक्षित है। इस मार्ग पर दौड़ने वाले वाहन कब नहर में समा जाएं कुछ नहीं पता।
सिर्फ 16 किमी में लगे क्रास बैरियर
कांवड़ पटरी मार्ग के 26 किमी हिस्से को पीडब्ल्यूडी निर्माण विभाग देखता है, जबकि 16 किमी की जिम्मेदारी प्रांतीय खंड के पास है। प्रांतीय खंड ने दो माह पहले जानी नहर से मुरादनगर तक (16 किमी) कांवड़ मार्ग पर नहर के किनारे लोहे के क्रास बैरियर लगवा दिए हैं। जबकि निर्माण खंड ने क्रास बैरियर लगाने का कार्य सिंचाई विभाग के पाले में डाल दिया है।
कौन कर रहा हाइट गेज का विरोध
कांवड़ मार्ग का निर्माण हलके वाहनों के लिए ही किया गया है। उसके बाद भी पुलिस की मिलीभगत से नहर पटरी से भारी वाहन गुजर रहे हैं। इससे हादसों में इजाफा हो रहा है। बीते साल सभी विभागों की हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि कांवड़ मार्ग पर जगह जगह हाइट गेज लगाए जाएं। ताकि भारी वाहनों को रोका जा सके। इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन सिवाया में टोल से भी बचने का काम करते हैं।
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हमने जानी नहर पुल से मुरादनगर तक कांवड़ मार्ग पर 40 लाख रुपये खर्च करके क्रास बैरियर लगवा दिए हैं। इससे हादसों में कमी आई है। हाइट गेज भी बनवाकर रखे हैं। अगर पुलिस सहयोग करे तो उनको भी लगवा दें।
-प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी
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कांवड़ मार्ग पर नहर किनारे बनाने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। उनकी भूमि पर हमें काम कराने का अधिकार नहीं है। इसलिए हमारा विभाग इस पर कुछ नहीं कर सकता।
-एसपी सिंह, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड पीडब्ल्यूडी