संयुक्त व्यापार संघ में गुटबाजी तेज, अध्यक्ष-महामंत्री आमने-सामने
पुरानी संस्थाओं से शुल्क वसूली और नई संस्थाओं को सदस्य बनाने पर फंसा मामला
वर्तमान कार्यकाल में एक भी बैठक नहीं हुई, आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू, सितंबर में चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। संयुक्त व्यापार संघ चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन अध्यक्ष और महामंत्री आपस में ही भिड़ गए हैं। दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। मामला पुरानी संस्थाओं से शुल्क वसूली और नए सदस्य बनाने पर फंस गया है। नई संस्थाओं को जोड़ना तो दूर, पुरानी संस्थाओं का शुल्क भी जमा करते हुए उनका नवीनीकरण नहीं किया गया है। जबकि चुनाव सितंबर में प्रस्तावित हैं। इसके अलावा करीब ढाई साल के इस कार्यकाल में कोई बैठक भी नहीं हुई। यह कार्यकाल संयुक्त व्यापार संघ का सबसे खराब कार्यकाल माना जा रहा है।
संयुक्त व्यापार संघ शहर ही नहीं, बल्कि जिले के व्यापारियों की सबसे बड़ी अराजनैतिक संस्था है। हालांकि संस्था पर अब तक भाजपा नेताओं का ही कब्जा रहा है। यह संस्था बेहद मजबूत रही है, लेकिन पिछले करीब 10 सालों से इसकी शक्ति क्षीण होती जा रही है। जिसका कारण आपसी गुटबाजी है। संघ की वर्तमान कमेटी का चुनाव सितंबर 2016 में हुआ था। संघ का कार्यालय मेट्रो प्लाजा में है, जो संघ की संपत्ति है। लेकिन इस कार्यालय पर ताला लगा रहता था। वर्तमान कमेटी जब निर्वाचित हुई तो महामंत्री अरुण वशिष्ठ के नेतृत्व में उनके पैनल ने ताला तोड़कर कार्यालय खुलवाया और वादा किया कि हर माह संघ की बैठक होगी, जिसमें व्यापारियों की समस्याओं से संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी बुलाया जाएगा। आज तक कोई बैठक नहीं हुई। 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार आई, तो संगठन और शिथिल हो गया। क्योेंकि संघ के तमाम पदाधिकारी भाजपा से जुड़े हैं, तो वे अपनी ही केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन कैसे करें? अब फिर से चुनावी हलचल के बीच पुरानी संस्थाओं का शुल्क जमा कर उनका नवीनीकरण और नई संस्थाओं को बनाने की कवायद शुरू हो गई है, लेकिन इसमें भी गुटबाजी उभर आई है।
आमने-सामने
अपनी कमियां छिपा रहे महामंत्री अरुण वशिष्ठ : नवीन गुप्ता
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कहा कि संगठन स्तर पर यह कार्यकाल पूरी तरह निराशाजनक रहा है। पदाधिकारी व्यक्तिगत कामों में व्यस्त रहे। लेकिन मैंने अपने स्तर पर जो भी व्यापारियों की समस्याएं आईं, उनका समाधान कराया। महामंत्री अरुण वशिष्ठ पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने तो चुनाव जीतने के बाद कोई भी वादा पूरा नहीं किया। अरुण वशिष्ठ अपनी कमियों को छिपाकर दूसरों पर डालते रहे। वह पहले मेरे अध्यक्ष रहे और आज महामंत्री हैं, लेकिन वह इसे कभी पचा नहीं सके। महामंत्री को मात्र दो हजार रुपये खर्च करने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने बिना कार्यसमिति में प्रस्ताव रखे कार्यालय की साज सज्जा आदि पर दो लाख से ज्यादा खर्च कर दिए। उन्होंने कभी भी मुझसे संपर्क कर बैठक बुलाने का कोई प्रयास किया हो, तो बताएं।
नवीन को घालमेल करने की आदत : अरुण वशिष्ठ
संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री अरुण वशिष्ठ ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद पहले ही दिन से नवीन गुप्ता मुझे पचा नहीं सके। पिछले कार्यकाल में नवीन अध्यक्ष थे, तो महामंत्री उन्हीं के पक्ष के थे। लेकिन मेरे महामंत्री बनने के बाद ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैं पूरी पारदर्शिता से काम करता हूं और नवीन को घालमेल करने की आदत है। हां, यह जरूर है कि पिछले कार्यकालों की तुलना में यह कार्यकाल निराशाजनक रहा है। इसके पीछे अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। कार्यालय में बैठने का काम सभी का था, लेकिन अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कभी भी संपर्क नहीं किया कि बैठक बुलाई जाए। अब चुनाव की तैयारी के बीच नवीन को सिर्फ नई संस्था पंजीकृत कराने और पुरानी संस्थाओं के शुल्क जमा कराने की चिंता है। वह लगातार कोषाध्यक्ष पवन मित्तल को फोन कर दबाव बना रहे हैं। लेकिन मैं महामंत्री हूं। इस पर निर्णय कोषाध्यक्ष और मुझे लेना है, फिर भी मुझसे संपर्क नहीं कर रहे हैं।