फलावदा। गांव दांदूपुर शिव मंदिर प्रांगण में गुरुकुल लाक्षागृह बरनावा के तत्वावधान में पूज्यपाद गुरुदेव ब्रह्मा कृष्णदत्त जी महाराज शृंगी ऋषि की प्रेरणा से पांच महाकुंडीय चतुर्वेद परायण महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसके दूसरे दिन शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि ब्रह्माचार्य योगेश दत्त आर्य एवं महायज्ञ के ब्रह्मा गुरुवचन शास्त्री ने चतुर्वेद परायण महायज्ञ में आहुति देकर आरंभ कराया।
शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित महायज्ञ के लिए पांच बड़े महाकुंडों में यजमानों ने श्रद्धालुओं के साथ आहुति देकर शुभारंभ कराया। चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के दूसरे दिन बिजनौर जनपद से कई विद्वान ब्रह्मा आचार्य पहुंचे। इस दौरान महायज्ञ के ब्रह्मा गुरु वचन शास्त्री ने महायज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यज्ञ हमारे देश के ऋषि मुनियों की आध्यात्मिक संस्कृति धरोहर है। जिसके द्वारा संसार में मनुष्य का जीवन एवं पर्यावरण की शुद्धता की जाती है। वेदों में महायज्ञ को संसार में श्रेष्ठतम कर्म बताया है। विजयदशमी का त्योहार भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने अपने घरों में महायज्ञ के आयोजन किया था। आज के समय में संसार के सभी लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। जिस कारण आज इंसान अपने त्योहारों पर यज्ञ कराने के स्थान पर आतिशबाजी पुतला दहन इत्यादि करते हैं। जिस कारण संसार में प्रदूषण बढ़ रहा है। इंसान विभिन्न प्रकार के रोगों की चपेट आकर मृत्यु काल में पहुंच रहे हैं। इसलिए संसार के सभी समाज के वर्ग के लोगों को जीवित रहने के लिए अपने घरों में प्रात:काल महायज्ञ संस्कृति वैदिक काल का अनुसरण करना होगा तभी जाकर संसार का उद्धार हो सकेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण एवं सैकड़ों लोगों को भोजन कराया। यहां तेज सिंह पोसवाल, पूर्व प्रधान बॉबी गुर्जर, उदयवीर, शिवकुमार देवी सिंह, सुदेश सेठ, बचन सिंह गोरिया, भारतवीर, अनुज, विक्रम प्रधान, चतरसेन गौरव पोसवाल सतपाल सिंह आदि उपस्थित थे।
मुख्य बातें
दांदूपुर शिव मंदिर प्रांगण में पांच महाकुंडीय चतुर्वेद परायण महायज्ञ