मवाना। डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए हर वर्ष स्वास्थ्य समिति के खाते में आने वाले धन की बंदरबांट हो रही है। इसके चलते ग्राम पंचायतों में फॉगिंग महज कागजों में हो रही है। जिस कारण प्रत्येक वर्ष डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को शासन की ओर से बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारी भी जमीन के बजाय सिर्फ कागजों में ही दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। मवाना तहसील की ग्राम पंचायतें भी इससे अछूती नहीं हैं।
शासन की यह है योजना
डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए कुछ वर्षों पहले शासन ने ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य समिति गठित की थीं। इसके लिए ग्राम प्रधान एवं एएनएम का संयुक्त खाता बैंक शाखा में खुलवाया गया था। इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत के खाते में हर वर्ष दस हजार रुपये खाते में आए। इस धन से ग्राम पंचायत को फॉगिंग मशीन खरीदनी थी। इसके उपरांत मच्छरों से निपटने के लिए गांवों में फॉगिंग कराना था। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी कार्य भी इन धन से कराए जाने थे।
हर वर्ष 14 लाख 70 हजार रुपये की बंदरबाट
मवाना तहसील के मवाना ब्लॉक में 47, हस्तिनापुर ब्लॉक में 46 एवं परीक्षितगढ़ ब्लॉक में 54 ग्राम पंचायत हैं। प्रतिवर्ष इन तीनों ब्लॉक में प्रत्येक ग्राम पंचायत के खाते में दस हजार के हिसाब से 14 लाख 70 हजार रुपये आते हैं। प्रधान एवं एएनएम इन रुपयों को निकाल तो लेते हैं। इनसे मशीन खरीद एवं फॉगिंग कराया जाना कागजों में दर्शा देते हैं। इस तरह सरकार को हर वर्ष लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। हालांकि जिले की बात करें तो पूरे जिले में 483 स्वास्थ्य समिति हैं।
यह है प्रावधान
शासन से आए दस हजार रुपये में फॉगिंग मशीन खरीदने के बाद ग्राम प्रधान को जिला मलेरिया अधिकारी को बिल प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद गांव में मच्छरों को मारने के लिए फॉगिंग कराया जाता है। इस योजनांतर्गत प्रावधान है कि यदि गांव में कोई भी मरीज डेंगू का पाया गया तो इसका जिम्मेदार ग्राम प्रधान होगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं ग्राम प्रधान को उस मरीज के उपचार का पूरा खर्च उठाना होगा। उक्त तीनों ब्लॉकों में आज तक फॉगिंग मशीन नहीं खरीदी गई और न ही फॉगिंग कराई गई। इससे संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच कराना भी उचित नहीं समझा।
वर्जन
गांवों में समय-समय पर सफाई कराई जाती है। फॉगिंग के मामले को स्वास्थ्य विभाग देख रहा है। यदि ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी। -अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
मेरे संज्ञान में फॉगिंग मशीन का मामला नहीं है। कुछ वर्ष पहले दवा खरीदने के आदेश हुए थे। जिससे गांवों की नालियों और तालाबों में स्प्रे किया जाता था।-डॉ. अनिल शर्मा, सीएचसी प्रभारी मवाना
सभी सीएचसी एवं पीएचसी को लगातार निर्देशित किया जा रहा है। तीन दिन पहले भी छिड़काव कराने के आदेश दिए थे।-योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
मुख्य बातें
स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों ने मिलीभगत कर लाखों रुपये डकारे