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श्रीनगर से छोडे गए पानी ने खादर में मचाई तबाही मचानी शुरु कर दी है।

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मवाना/हस्तिनापुर। श्रीनगर से बृहस्पतिवार को छोडे़ गए पानी ने शुक्रवार को हस्तिनापुर खादर में पहुंच तबाही मचानी शुरू कर दी है। खादर के एक दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। यहां करीब 25 गांव पानी से घिर गए। सड़कों और खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। उपजिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव ने तहसील टीम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ खादर के पानी से घिरे गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। खादर में 10 नाव लगा दी गई हैं।
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उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को तहसील प्रशासन को सूचना मिली थी कि श्रीनगर से एक लाख 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसके बाद तहसील प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया था। गांवों में मुनादी कर लोगों को सचेत रहने तथा यदि संभव हो तो सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का आह्वान किया था।
देर रात श्रीनगर से छोड़ा गया पानी हस्तिनापुर खादर में पहुंच गया और तबाही मचानी शुरु कर दी। गंगा के बढ़ते जल स्तर से तटबंध को खतरा पैदा हो गया है। टूटे तटबंध में से पानी गांव और जंगलों की ओर कूच कर रहा है। जिससे गांव के चारों ओर तथा सड़कें पानी से लबालब हो गई हैं। लगभग एक दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं तथा दो दर्जन से अधिक गांव रठौड़ा कला, दबखेड़ी, किशनपुर आदि पानी से घिर गए हैं। उपजिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव ने तहसील टीम तथा सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ पानी से घिरे गांव दबखेड़ी, रठौरा कला, लतीफपुर, फतेहपुर आदि का दौराकर स्थिति का जायजा लिया। उपजिलाधिकारी ने बताया कि अभी हालात काबू में हैं। सड़कों तथा गांव के चारों ओर पानी है, लेकिन मकान अभी सुरक्षित हैं। लोगों को सचेत रहने के लिए कहा गया है। वहीं, उन्होंने बताया कि 10 नाव लगाई गई हैं। दो नाव शनिवार को और बढ़ा दी जाएगी। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट रहने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि इस समय गंगा में लगभग एक लाख 74 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। हालात अभी काबू में हैं। फिलहाल खतरे जैसी कोई बात नहीं है।
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हजारों हेक्टेयर फसल खराब
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र के दो दर्जन से भी ज्यादा गांव में बाढ़ जैसे हालात हैं। किसानों की धान और गन्ने की फसल भी नष्ट होने की कगार पर है। किसानों की हजारों हेक्टेयर धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। लगातार दो सप्ताह से पानी भरा होने के कारण धान की फसल पानी में गल चुकी है। जिससे किसानों की आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने शासन-प्रशासन से नष्ट हुई फसल के उचित मुआवजे की मांग की है। बिजनौर बैराज से अवर अभियंता पीयूष कुमार के अनुसार पानी का डिस्चार्ज 1.87 लाख क्यूसेक चल रहा है। यह लगातार खादर क्षेत्र से होकर गुजर रहा है। जल स्तर बढ़ने का क्रम अभी जारी है। गंगा के जलस्तर में हो रही भारी वृद्धि से तटबंध कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। जिससे कई गांवों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। प्रशासन के बार-बार अलर्ट करने के बाद भी कुछ परिवार गांव में ही जमे हुए हैं। कुन्हेड़ा गांव में आरिफ पुत्र यूसुफ, जुल्फिकार पुत्र यूसुफ और इरशाद पुत्र युसूफ आदि के घरों में दरार आ गई हैं। उनका कहना है कि मकान कभी भी गिर सकते हैं। इससे जान को खतरा बढ़ गया है। क्षेत्र के गांव दबखेड़ी, हंसापुर, रिठौरा कलां, कुन्हेड़ा, फतेहपुर प्रेम, सिरजेपुर, बड़ी चामरौद व भीमकुंड किशनपुर आदि के ग्रामीण परेशानियों से जूझ रहे हैं।
पशुओं के लिए जानलेवा
ग्राम दबखेड़ी निवासी रणवीर सिंह और कुन्हेड़ा निवासी यूसुफ की गायों की मौत हो चुकी है। गांव के रास्ते में पानी भरा होने से इनको समय से इलाज नहीं मिल सका। इसलिए बाढ़ से ग्रामीण पशु जंगली जानवर को भी प्रभावित हो रहे हैं।
किसानों को सतर्क कर रहे
सिंचाई विभाग के एसडीओ पंकज जैन, अवर अभियंता संजय सिंह एवं जेई योगेश कुमार ने शुक्रवार को ड्रोन कैमरे से गंगा किनारे क्षेत्र की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि अभी बहुत गंभीर स्थिति नहीं है। हालांकि खादर क्षेत्र में तीन जगह से तटबंध टूट गया है। जिससे खेतों में पानी जा रहा है। इसके लिए किसानों को भी सतर्क किया जा रहा है।
बीमार मवेशियों का कर रहे उपचार
क्षेत्रीय ग्रामीणों, पशुओं और जंगली जानवरों को बाढ़ से जूझना पड़ रहा है। वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारी पशुओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। आज हस्तिनापुर के पशुपालन विभाग के डॉक्टर राकेश कुमार पशुधन प्रसार अधिकारी बाढग़्रस्त गांव में पशुओं को दवा देने पहुंचे। दबखेड़ी के समय सिंह की भैंस का इलाज किया। वहीं, दूधली खादर में मांडू की गाय का इलाज किया और किशनपुर में टिल्लू आदि की गाय का इलाज किया। डॉ. रामफल ने बताया कि अधिक से अधिक पानी में जाकर भी पशुओं के इलाज के लिए दवा दे रहे हैं। इस संबंध में पशुपालन विभाग के डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बीमार पशुओं के उपचार के लिए टीम लगाई गई हैं।
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