बहसूमा। टिकौला शुगर मिल कर्मचारियों ने गन्ना सर्वे के नाम पर केवल खानापूर्ति कर इतिश्री कर ली है। बिना गन्ने की पैमाइश एवं सर्वे किए बडे़ किसानों के यहां बैठकर सर्वे की सूची बनाकर मिल में जमा कर दी है। मिल कर्मचारियो की इस कार्यप्रणाली से किसानों में आक्रोश है। आरोप है कि मिल के कामदार बिना सूचना एवं मुनादी कराये सर्वे कर ले गए।
किसान सतबीर सिंह, विरेंद्र नागर, राजेंद्र सिंह, अरविंद चाहल ने बताया कि शासन से गन्ना सर्वे का प्रदर्शन गत छह जुलाई से प्रस्तावित है। जिला गन्ना अधिकारी के निर्देशानुसार किसानों को मौके पर रहकर सर्वे कराने के लिए कहा गया था। विभाग की टीम को गांव-गांव जाकर सूची का प्रदर्शन करना था। आरोप है कि मि0ल के कामदार ने किसानों के गन्ने के खेतों में बगैर पहुंचे और बिना मुनादी कराए सर्वे की औपचारिकता पूरी कर ली। इसके बाद सूची जमा करा दी। समिति के कर्मचारियों ने पहले ही सर्वे में गड़बड़ी कर रखी है। इसका किसानों ने विरोध किया था। जहां एक ओर शासन से सर्वे की पारदर्शिता बरतने के निर्देश हैं। वहीं दूसरी ओर बेखौफ मिल कामदार बैगर मौके पर पहुंचे सर्वे कर रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी व मिल के अध्यासी अध्यक्ष से पुन: सर्वे कराने की मांग की है। हालांकि सूचियों का सत्यापन होने के बाद 21 जुलाई अर्थात आज से किसानों को कच्चा कलेंडर बंटना प्रारंभ हो जाएगा।
यही हाल क्षेत्र के अकबपुर सादात के किसानों का भी है। किसान सतबीर सिंह, मोनू, ओमकार, साजिद, आस मौहम्मद का कहना है कि टिकौला शुगर मिल के कामदार ने मनमाफिक सर्वे किया है। किसानों ने मिल अधिकारियों से पुन: सर्वे कराने की मांग की है।
वहीं, टिकौला शुगर मिल के अध्यासी अध्यक्ष एमडी शर्मा का कहना है कि मिल कर्मचारी मुकेश ने गन्ने का सर्वे हवाई करने की सूचना पहले भी मिली थी। उसे कारण बताओ नोटिस दिया जा रहा है। किसानों के सर्वे के कच्चा कलेंडर पुन: संशोधित किया जाएगा।
गन्ने की अपेक्षित कीमत मांगी
बहसूमा। केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी में 20 रुपये की बढ़ोतरी किए जाने से गन्ना किसानों की निगाहें प्रदेश सरकार के न्यूनतम मूल्य पर टिकी हैं। किसान महंगाई एवं लागत के आधार पर नये सत्र में प्रदेश सरकार से 370-450 रुपये तक समर्थन मूल्य की उम्मीद कर रहे हैं। प्रदेश सरकार शुगर मिल चालू होने के बाद गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। रालोद के जयबीर सिंह का कहना है कि भाजपा ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में 450 रुपये प्रति कुंतल गन्ना मूल्य दिलाने की बात कही थी। यूपी के अतिरिक्त अधिकतर प्रदेशों में भाजपा की सरकारें हैं। महंगाई किसानों की लागत के अनुसार राज्य सरकार को 450 रुपये प्रति कुंतल मूल्य घोषित करना चाहिए। कांग्रेस नेता कुंवर देवेंद्र सिंह का कहना है कि केद्र सरकार ने गन्ने की उत्पादन लागत 155 रुपये प्रति कुंतल मानी है। जबकि सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ ने 267 रुपये प्रति कुंतल आ रही है। प्रदेश सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य 350 रुपये कुंतल करने की मांग की। सपा के केपी धीमान और भाकियू के इमरान ने 400 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग की है।