मवाना। मवाना शुगर मिल की ऑडिट में करोड़ों के गबन की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं। गबन में आरोपी बनाए पांच लोगों ने 2015 तक मिल में कार्य किया, जबकि अभी तक मवाना शुगर मिल का 2013 तक का ऑडिट हुआ है। वर्ष 2014-15 के आडिट के बाद और भी गबन होने की बात सामने आने की मिल प्रशासन आशंका जता रहा है।
बताते चलें कि मवाना शुगर मिल का कुछ महीने पहले ऑडिट कराया गया था। ऑडिट मैसर्स एसके एमबी कंपनी द्वारा किया गया था। ऑडिट रिपोर्ट मिल को भेजने के बाद 1.64 करोड़ का गबन सामने आया था। गबन का मामला सामने आने पर हेड आफिस द्वारा चार सदस्य कमेटी में आरके गंगवार, बीबी मेहता, एमवी कौशिक, विनित खुराना को साथ लेकर मामले की जांच की गई। जांच में कर्मचारियों के पीएफ के साथ, फर्जी तरीके से वाउचर बनाकर भुगतान लेने, सामान नहीं खरीदने के बावजूद फर्जी बिल देकर वाउचर के माध्यम से भुगतान लेने और अन्य खर्चों का हवाला देकर भुगतान लेने का मामला प्रकाश में आया। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में नौ लोगों दयाल चंद पोपली, विकास गोयल, अमित कुमार, मोहित रस्तोगी, शकील अहमद, सुनील कुमार, अरुण कुमार, मोहम्मद मोमीन, मोहित अहलावत पर संदेह व्यक्त किया। कर्मचारियों के साथ मिल प्रबंधन को भी चूना लगाए जाने को लेकर महाप्रबंधक प्रमोद बालियान ने एसएसपी को मुकदमा दर्ज कराए जाने को लेकर तहरीर दी थी। जिसमें पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दो ऑडिट में दो गबन के मामले प्रकाश में आने के बाद अभी और भी गबन सामने आने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल मुकदमें में शामिल किए पांच कर्मचारी दयाल चंद, अमित कुमार, अरुण यादव, मोहम्मद मोमीन, मोहित अहलावत 2015 तक मिल में कार्यरत थे। हालांकि मिल की ऑडिट अभी तक 2013 तक ही कराई गई है। दो ऑडिट में दो गबन के मामले सामने आने के बाद जल्द ही 2014-15 की ऑडिट कराने की बात भी सामने आ रही है। पहले ऑडिट के गबन में सामने आए पांच लोगों में से एक जमानत पर बाहर है। हालांकि चार लोग अभी जेल में हैं। महाप्रबंधक प्रमोद बालियान का कहना है कि हेड आफिस के आदेश पर उन्होंने तहरीर दे दी थी। पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। वर्ष 2014-15 का ऑडिट कराने के लिए हेड आफिस से ही निर्णय लिया जाएगा।
मुख्य बातें
नामजद में से पांच लोगों ने 2015 तक किया है शुगर मिल में कार्य
2013 तक की आडिट में दो गबन के मामले प्रकाश में आए