करोड़ों खर्च के बावजूद विकास की बांट जोह रही नवीन मंडी
शरद गुप्ता
मवाना। करोड़ों की लागत से बनाई गई नवीन मंडी आज आढ़तियों व किसानों के लिए नासूर बनी हुई है। विकास के नाम पर लाखों-करोड़ों का शुल्क वसूलने के बाद भी मंडी 15 साल बाद भी गुलजार नहीं हो सकी है। मंडी समिति के सुविधाएं न देने के कारण किसानों व आढ़तियों का यहां से मोह भंग होता जा रहा है।
साल 2003 में उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन कृषि एवं कृषि निर्यात मंत्री हुकुम सिंह व पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने हस्तिनापुर रोड स्थित नवीन मंडी का शिलान्यास किया था। मंडी को बनाने में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए गए। मंडी के निर्माण के बाद इसका लोकार्पण शिवपाल यादव ने किया था। देहात का किसान लोकल में ही रहकर शहर के दाम प्राप्त कर सके और सभी सुविधाएं मिले इस उद्देश्य से मवाना में मंडी का निर्माण किया गया था। लेकिन सुविधाओं के अभाव में आज किसान शहर की ओर रुख कर रहा है, जिस कारण 15 साल बीत जाने के बाद भी मंडी गुलजार नहीं हो सकी है।
टंकी बनी सफेद हाथी
नवीन मंडी के निर्माण के दौरान आढ़तियों व किसानों को पेयजल की दिक्कत न हो इसके लिए लाखों रुपए खर्च करके टंकी का निर्माण किया गया था। आढ़ती शादाब, आरिफ, नवाब ने बताया कि 2003 में मंडी के निर्माण के दौरान टंकी का निर्माण कराया गया, जो 2006 में संपन्न हुआ। लेकिन पिछले 15 सालों से टंकी सफेद हाथी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि टंकी निर्माण के बाद लगभग तीन चार माह तक चली थी।
गंदगी का अंबार, शौचालयों पर लटके ताले
नवीन मंडी में समिति ने सफाई व्यवस्था के लिए ठेका जरुर छोड़ रखा है, लेकिन सफाई कर्मचारी मंडी में सफाई नहीं करते। मंडी में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, वहीं शौचालयों पर ताले लटके रहने के कारण आढ़तियों व किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार आढ़तियों ने साफ-सफाई को लेकर शिकायत की, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक ओर केंद्र व प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन को लेकर लोगों को जागरुक कर रही है, वहीं सरकार के नुमाइंदे ही सरकार के इन प्रयासों को पलीता लगाने में लगे हुए है। इसके अलावा किसानों के ठहरने के लिए बनाया गया किसान भवन पर भी ताला लटका हुआ है और जिस कारण किसान को रात के समय में बाहर ही टहलकर रात गुजारनी पड़ती है।
टूटी सड़क, पथ प्रकाश व्यवस्था भी खराब
मंडी के निर्माण के बाद से ही मंडी के अंदर की सड़क पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। मंडी की सड़क जगह-जगह से टूटी पड़ी हुई है। वहीं पथ प्रकाश व्यवस्था के लिए खंभों पर लगाई गई स्ट्रीट लाइट भी टूटी पड़ी है, जिस कारण रात के समय में आढ़तियों व किसानों को अंधेरे में भय बना रहता है। इसके अलावा सीमेंट से निर्मित टीन शेड भी पूरी तरह से टूटे हुए है, जिनके कभी भी तेज आंधी से गिरने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा कुछ आढ़तियों ने अपनी दुकानों के सामने जाल लगाकर उन पर अवैध रुप से कब्जा कर लिया है।
सब्जी व फल तक सिमटी मंडी
नवीन मंडी का निर्माण उस दौरान यह सोचकर कराया गया था कि यहां सब्जी, फल, गुड़ व अन्य खाद्यान्न सामान आने से जहां एक ओर सरकार को टैक्स के रुप में राजस्व प्राप्त होगा, वहीं किसानों को भी शहर के धक्के नहीं खाने होंगे। देहात में भी रहकर शहर के दाम किसान को आसानी से प्राप्त हो जाएंगे। परंतु सुविधाओं के अभाव के कारण किसान शहर की ओर रुख कर रहा है तो आढ़तियों का भी अब मंडी की ओर से मोह भंग होने लगा है।
सामान पर ढाई प्रतिशत शुल्क
नवीन मंडी में लगभग 80 दुकानें है और सभी भरी हुई है। मंडी में आने वाले सामान से मंडी समिति दो प्रतिशत का मंडी शुल्क व आधा प्रतिशत शुल्क विकास के नाम पर लेती है। प्रतिदिन हजारों रुपए के रुप में शुल्क प्राप्त होता है। बावजूद इसके भी मंडी विकास से अछूती है।
मंडी में टंकी दोबारा से चलवाने व सड़क की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, प्रस्ताव पास होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।- राजपाल, नवीन मंडी सचिव
खास बातें:
पेयजल, पथ प्रकाश व्यवस्था, शौचालयों की हालत भी खस्ता