फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रमजान के पहले अशरे में बरसती अल्लाह की रहमत

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
रमजान के पहले अशरे में बरसती है अल्लाह की रहमत
सरूरपुर। रमजान महीने में तीन अशरे होते है जिनमें पहले अशरे में बंदों पर अल्लाह की रहमत बरसती है। अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि रमजान उल मुबारक बड़ा ही बरकत का महीना है। इस महीने में हर इबादत का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है।
विज्ञापन

मौलाना यूसुफ कासमी ने बताया कि रमजान के पहले दस दिन के अशरे में अल्लाह की खास रहमत बरसती है। दूसरे अशरे में अल्लाह लोगों के गुनाहों को ज्यादा माफ करता है और तीसरे अशरे में अल्लाह अपने बंदों को दोजख से छुटकारा अता फरमाते हैं। उन्होंने बताया कि इस रमजान माह में नमाज तरावीह एक ऐसी इबादत है जिसमें कुरान शरीफ पढ़ी जाती है। इस माह में एतिकाफ के बारे में बड़ी फजीलत है। एतिकाफ एक ऐसी इबादत है जो सब कुछ छोड़कर अपने परवरदिगार की बारगाह में आकर बैठ जाए। एतिकाफ करने वाले इंसान का सोना, जागना, खामोश रहना, चलना, बैठना गर्ज यह कि उसके चौबीस घंटे इबादत में लिखे जाते हैं। इमाम मौलाना इरशाद ने बताया कि इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है और भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। रमजान माह में दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते है और जन्नत की राह खोल दी जाती हैं। बताया कि रोजे रखने का असल मकसद महज भूख-प्यास बर्दाशत करना नहीं हैं बल्कि रोजे की रूह दरअसल नफ्स पर काबू, अल्लाह के तरीके पर अकीदत और सही राह पर चलने के इरादे पर मुस्तैदी से अमल में बसती हैं। जिससे रोजेदारों में भले-बुरे को समझने की सलाहियत पैदा हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें