आने थे मेहमान, निकल आए तीन सौ से ज्यादा सांप
मवाना/मेरठ। कहानी फिल्मी सी लगती है। लेकिन मवाना के मोहल्ला मुन्नालाल निवासी सलीम पुत्र अमीरुद्दीन की मानें तो एक सपोले को मारना उनके लिए मुसीबत बन गया। इस घटना के बाद घर के एक कोने में बने छेद से सांपों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान 300 से ज्यादा छोटे-बड़े सांप निकले। सभी मार डाले गए। दावा है कि ईश्वर से कृत्य के लिए क्षमा मांगने के बाद ही यह क्रम थम सका।
फर्नीचर व्यापारी सलीम के अनुसार उन्होंने करीब 20 वर्ष पूर्व प्लॉट खरीदकर मकान बनाया था। भरापूरा परिवार है। करीब दो सप्ताह पहले मकान की मरम्मत के दौरान बचे रेत को बोरों में भरकर मुख्य द्वार के निकट रख दिया था। इनके पास से बीते बृहस्पतिवार को सांप का एक बच्चा निकला। परिजनों ने उसे मारकर फेंक दिया। कुछ मेहमान आने थे इसलिए घर की सफाई कर उक्त बोरों को शुक्रवार शाम करीब पांच बजे हटाया गया। इस दौरान इनके पीछे से चार-पांच सांप दिखाई दिए। उनको जहरीला स्प्रे करके बेहोश कर दिया तथा बाद में मारकर फेंक दिया। इसके बाद सांप निकलने का क्रम जारी हुआ, जिसने परिजनों और आसपास के लोगों के होश उड़ा दिए।
वे सांपों को मारते तो दीवार के छेद से और सांप निकल आते। इसकी जानकारी पर वहां ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। रात करीब 11 बजे सैकड़ों की संख्या में सांप निकल आए तथा उनका निकलना बंद नहीं हुआ। इस पर सलीम के परिजनों ने ईश्वर से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी तथा परिवार के लोगों ने इबादत शुरू कर दी। कुरान-ए-पाक की तिलावत के साथ ही वहां दूध से भरा कटोरा रखकर दीपक जला दिया। इसके बाद सांपों का निकलना बंद हो गया। यहां लगभग छह घंटे तक परिजनों के होश उडे़ रहे।
साहस नहीं जुटा पाए
जिस छेद से सांप निकल रहे थे। परिजनों ने उसे बंद करा दिया। हालांकि वे यह देखने का साहस नहीं जुटा पाए कि वह कितना गहरा है। सलीम का कहना है कि पहले कभी उनके यहां सांप नहीं निकला।
नहीं होगी कानूनी कार्रवाई
मौके पर पहुंचे हस्तिनापुर के रेंजर विनोद कुमार का कहना है कि उनको वहां फिलहाल कुछ नहीं मिला। वहीं, डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि सभी सांपों को नहीं मारा गया है। उन्हें रास्ता बनाकर नाले में निकाल दिया है। घर में निकले सांपों के साथ आत्मरक्षार्थ ऐसा व्यवहार किया गया है। इसलिए कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। जहां से सांप निकले थे उसे सीमेंट से बंद कर दिया है। भविष्य में सांप निकले तो इसकी जांच होगी।
सांपों का संसार, भ्रांतियां भरमार
सांपों को लेकर समाज में भ्रांतियों एवं अफवाहों की भरमार है। जैसे सांप दूध पीता है, बीन की आवाज पर लहराता है। मेरठ कालेज के ज्यूलॉजी विभाग के डॉ. कपिल कुमार बताते हैं सांपों को रहने का यदि बेहतर माहौल मिले तो वह वहीं अपना आशियाना बना लेते हैं। मौसम के हिसाब से सांप को खुद को एडजस्ट करना पड़ता है।
सांप को लेकर कुछ बातें
- सांप की जीभ दो भागों में बंटी होती है। नुकीली होती है। वह दूध पी ही नहीं सकता। न ही दूध को पचा सकता है।
- वह पूरा भोजन सटकता है। तरल नहीं लेता है
- सांप सुन नहीं सकता। उसके बाह्य कान नहीं है। वह केवल वाइब्रेशन महसूस करता है।
- बीन बजती है तो उसकी आवाज भी सांप को नहीं सुनती वह केवल बीन के हिलने पर ही हिलता है।
- सांप कोल्ड ब्लडेड है। मनुष्य हॉट ब्लडेड है। वातावरण के साथ सांप के शरीर का तापमान बदल जाता है इसलिए उसे गर्मी और सर्दी दोनों में ही छिपना पड़ता है।
- 70 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें सांप के काटने में जहर से नहीं डर यानी हार्टअटैक से मौत होती है।
वह रैट स्नैक हैं
जो सांप मारे गए हैं, लग रहा है कि वह रैट स्नैक हैं। वातावरण ठीक देखकर यहीं पनप गए होंगे। वैसे सांप आबादी से दूर ही रहते हैं। कभी कभार घरों में नीचे भी पनप जाते हैं। -डॉ. कपिल कुमार, ज्यूलॉजी विभाग मेरठ कॉलेज
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