गन्ने के चालू पेराई सत्र में किसानों ने बंपर पैदावार करके रिकार्ड कायम किया है। चीनी रिकवरी का परता भी पहली बार ऐतिहासिक बना। इसके बावजूद चीनी मिले किसानों का गन्ना भुगतान देने को तैयार नहीं हैं। वहीं, सरकार का 14 दिन में गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने का दावा भी कारगर साबित नहीं हो सका है।
बजाज ग्रुप की किनौनी शुगर मिल गन्ना पेराई करने में अग्रणी है। क्षेत्र के किसानों ने इस वर्ष गन्ने की अगेती प्रजाति की बुवाई कर पैदावार में रिकार्ड कायम किया है। किनौनी चीनी मिल ने चालू पेराई सत्र में 162 दिन पेराई की। इस दौैरान एक करोड़ 60 लाख कुंतल गन्ने की पेराई करके 12.30 प्रतिशत रिकवरी प्राप्त की। इसके चलते 16.55 लाख चीनी के बोरे बनाने का रिकार्ड पहली बार बनाया है। वहीं, बजाज शुगर मिल किनौनी ने अभी तक पांच सौ करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है। उसने मात्र 120 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। अभी करीब चार सौ करोड़ रुपये मिल पर किसानों के देय हैं। ऐसे में सरकार का 14 दिन में गन्ना मूल्य भुगतान कराने का घोषणा पत्र में दावा हवाई साबित हो रहा है। गन्ने की रिकार्ड पेराई करने के बावजूद क्षेत्र में अभी 15 से 20 फीसदी गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है। वहीं, चीनी मिल प्रबंधन कम इंडेंट जारी करके गन्ने की खरीद करने में आनाकानी कर रहा है। आए दिन किसान गन्ना विभाग के अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर लगा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि किनौनी चीनी मिल प्रबंधन ने अभी तक मात्र 20 दिसंबर तक का ही गन्ना मूल्य भुगतान किया है। वे चार माह का गन्ना मूल्य भुगतान दबाए हुए हैं। आरोप लगाया कि गन्ना विभाग और सरकारी तंत्र आए दिन भुगतान कराने का झूठा दावा कर किसानों को गुमराह कर रहा है। किसान गन्ना मूल्य भुगतान नहीं मिलने की वजह से बच्चों की स्कूल फीस एवं जरूरी काम ब्याह-शादी, गन्ने की बुवाई के लिए बीज, खाद और कीटनाशकों की खरीद के लिए मोहताज हो चुका है। ऐसे में यहां के किसान को महाराष्ट्र की तरह कर्ज में डूबने के बाद आत्महत्या करने को विवश होना पडे़गा। क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र सिंह सतवाई का कहना है कि चीनी मिलों पर गन्ने का भुगतान कराने के लिए सरकार लगातार दबाव बनाए हुए है। चीनी मिलें गन्ने का भुगतान देने में आनाकानी कर रही है। उन्हें चिह्नित कर उनके खिलाफ विधिक कार्यवाही कराई जायेगी। वहीं, किनौनी चीनी मिल के यूनिट हेड केपी सिंह का कहना है कि चीनी की ब्रिकी कम होने के कारण भुगतान में देरी हो रही है। गन्ना अधिकारियों की देखरेख में चीनी बिक्री से नियमानुसार गन्ने का भुगतान किया जा रहा है।
मुख्य बातें
यूनिट हेड बोले, चीनी बिक्री से नियमानुसार गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा रहा