गांव फफूंडा में अज्ञात बीमारी से दर्जनभर मवेशियों की मौत हो चुकी है। वहीं, कई दर्जन अब भी बीमार हैं। पशुपालकों ने गांव स्थित पशु अस्पताल के चिकित्सकों पर नदारद रहने का आरोप लगाया। अमर उजाला अखबार में समाचार प्रकाशित होने पर सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम पशुओं की जांच को पहुंची। बीमार पशुओं के खून के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए तथा रिपोर्ट आने के बाद पशुओं का उपचार शुरू किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम में केवल फार्मासिस्ट ही थे। चिकित्सक आज भी जांच को नहीं पहुंचे।
गांव फफूंडा में करीब पंद्रह दिन से पशुओं में अज्ञात बीमारी फैली हुई है। जिससे अब तक करीब अलग-अलग किसानों के 12 पशुओं की मौत हो चुकी है। अभी दो दर्जन पशु इस बीमारी की चपेट में हैं। ग्रामीणों ने गांव में बनेे पशु अस्पताल में तैनात चिकित्सकों पर ड्यूटी पर नहीं आने का आरोप लगाया था। इस गंभीर बीमारी से पशुओं के साथ-साथ ग्रामीणों में भी दहशत है। सरकारी पशु अस्पताल में तैनात चिकित्सकों द्वारा बीमार पशुओं की जांच नहीं करने पर पशुपालक गांव समेत आसपास के प्राइवेट पशु चिकित्सकों से लुट पिट रहे हैं। पशुओं में फैली भयंकर बीमारी का समाचार जैसे ही अमर उजाला में प्रकाशित हुआ तो पशुपालन विभाग की टीम सोमवार को दिन निकलते ही अस्पताल में पहुंच गई। टीम ने सभी पशुओं की जांच की तथा बीमार पशुओं के खून के नमूने लिये और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। दोपहर को जांच रिपोर्ट आने के बाद टीम ने पशुओं का उपचार शुरू किया। टीम ने इस बीमारी को मुंहपका-खुरपका बताया है। टीम ने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराएं।
जांच के लिए नहीं पहुंचे पशु चिकित्सक
ग्रामीणों का आरोप है कि पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया। जांच टीम सोमवार को गांव पहुंची परंतु अस्पताल में तैनात पशु चिकित्सक अभी तक भी नहीं आए हैं। जांच टीम में केवल फार्मासिस्ट एवं अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
इस बाबत पशु चिकित्सक डा. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि सुबह कई जगह से दवा एकत्र कराकर टीम भेजी गई है। शाम को कुछ पशुओं की हालत बिगड़ गई। इसलिए वह दोबारा टीम के साथ उनकी जांच के लिए स्वयं मौके पर पहुंचे हैं।
मुख्य बातें
ग्राम फफूंडा में खुरपका-मुंहपका की चपेट में हैं दर्जनों मवेशी