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अष्टान्हिका पर्व का समापन

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हस्तिनापुर। हस्तिनापुर स्थित जम्बूद्वीप स्थल पर अष्टान्हिक महापर्व के समापन अवसर पर भगवान शांतिनाथ की रथयात्रा ऐरावत हाथी पर निकाली गई। जिसमें मुख्य रूप से भगवान को लेकर के बैठने का अवसर सुभाष चंद साहूजी ने प्राप्त किया।
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भगवान के ऊपर चंवर ढुराने का सौभाग्य वीरेन्द्र शास्त्री, धन कुबेर विजय कुमार मंत्री जम्बद्वीप संस्थान एवं सारथी संजय जैन जम्बूद्वीप हस्तिनापुर एवं रवि जैन को प्राप्त हुआ। जम्बूद्वीप स्थल पर ऐरावत हाथी को सुसज्जित करके जन समूह के मध्य रथयात्रा निकाली गई। अंत में भगवान शांतिनाथ स्वामी का पंचामृत अभिषेक तीनमूर्ति मंदिर में संपन्न किया। जिसमें जल, दूध, दही, घी, सर्वोषधि आदि से भगवान का महाभिषेक जैन श्रद्धालु भक्तों ने किया। अंत में सारे विश्व में शांति की कामना के साथ महाशांतिधारा की गई। इस अवसर पर मुख्य रूप से दिल्ली से सुधीर कुमार, मंगलसैन, मुकेश जैन एवं मेरठ से सुनील कुमार, मनोज कुमार, राकेश जैन, जम्बूद्वीप से राजेश जैन प्रबंधक, संजीव, मनोज, अशोक, राजकुमार, सुनील आदि सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से भी भक्त शामिल हुए।

मनुष्य जीवन दोबारा मिलना बेहद कठिन
हस्तिनापुर।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर की मुख्य वेदी में सामूहिक अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। होली मेला के अवसर पर भव्य रथयात्रा निकाली गई। जिसमें मेरठ, सरधना, बड़ौत, दिल्ली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, जयपुर, राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं अन्य राज्यों से पधारे दस हजार श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ जी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त किया। श्री जी को लेकर सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुनील जैन, सार्थक जैन, संचित जैन वालों को प्राप्त किया। सारथी के रूप में भारत भूषण जैन, अभिषेक जैन, कुबेर इंद्र के रूप में राजीव, सागर, दांये व बांये इन्द्र बनने का सौभाग्य दिगम्बर प्रसाद, विजय कुमार मेरठ रथ में सवार होकर मुख्य मार्ग से होते हुए दिव्यघोष ओर शान्तिनाथ भगवान के जयकारें बोलते हुए जलमंदिर के निकट निर्मित पाण्डुकशिला पर पहुंचे। वहां भगवान शांतिनाथ का अभिषेक व पूजन किया गया। बाहर से पधारे श्रद्धालुओं ने भगवान की भक्ति की उसके बाद रथयात्रा वापस आकर प्राचीन बड़ा मंदिर में पहुंची। बाहर से पधारे सभी भक्तों के भोजन की व्यवस्था राजीव, निशा, सागर, नेहा, साहिल, आयुषी, आदविक की ओर से की गई। तीर्थ क्षेत्र पर विराजमान मुनिश्री 108 समाधि सागर जी महाराज ने बताया कि जीव अनादिकाल से संसार रूपी समुद्र में गोते खाता आ रहा है और खाता रहेगा। जब तक वह जिनेंद्र भगवान को वीतरागता को छोड़कर अन्यत्र कुगुरु, कुदेव और कुधर्म को पूजता रहेगा तब तक जीव का कदाचित कल्याण होने वाला नहीं है। जीव जैसे परिणाम रखता है उसको उसी प्रकार का फल मिलता है। चाहे वह इस भव में मिले या फिर अगले भव में। कर्म किसी को नहीं छोड़ते चाहे वह तीर्थंकर ही क्यों न हों। इसलिए इस मनुष्य जीवन का उपयोग बड़ी सरलता के साथ करना चाहिए। ये मनुष्य पर्याय पुन: मिलना अत्यन्त कठिन है। जिस प्रकार से यदि कीमती रत्न को प्राप्त कर उसको समुन्द्र में फेंक दो फिर उसका मिलना अत्यंत कठिन उसी प्रकार मनुष्य पर्याय है। समस्त कार्यक्रम में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष अनिल कुमार, उपाध्यक्ष सतेन्द्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, मंत्री प्रद्युम्न कुमार, शिखरचंद, मेला मंत्री राजेन्द्र कुमार, राजीव जैन, राजीव, जितेन्द्र, विनय, अनिल एवं मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज एवं समस्त पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। महाप्रबंधक मुकेश, अशोक, उमेश, अतुल, कमल, मणीचन्द, मुकेश आदि ने पूर्ण सहयोग किया।
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युवा भी धर्म के लिए समय अवश्य निकाले
हस्तिनापुर। विश्व की सुख-शान्ति-समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के आज छब्बीसवें दिन शनिवार को सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ हुआ।
आज के सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य सुशील जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का मुनीष कुमार को प्राप्त हुआ। देशराज, सचिन, अरिहंत जैन, सुंदरलाल, अमित को शान्तिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले मंगल द्वीप का दीप प्रज्ज्वलन मिर्नल, प्रिया, अमित, पवन जैन ने किया। ब्र. सुनीता दीदी व भावना दीदी ने संसार के सभी जीव सुखी रहें ऐसी मंगल भावना के साथ शान्तिधारा का उच्चारण किया। तदोपरान्त देव-शास्त्र-गुरु की पूजन आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बन्धुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाये। आज 108 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। जिसमें मुख्य रूप से सुमन जैन, उषा जैन, शिल्पी ने शामिल होकर पुर्ण्याजन किया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ सरोजिनी जैन ने संस्कृत भाषा में किया। इसी बीच अनेक प्रांतों से पधारे हुए यात्री भाई एवं प्रिया, रजनी, अनिल आदि ने पाठ का वाचन किया। आज विधान के मध्य विनोद एंड म्युजिक पार्टी की मधुर लहरी पर रेखा जैन, रानी जैन हस्तिनापुर ने भजन प्रस्तुत किए जिसे सुनकर वहां बैठे सभी भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। समस्त स्थानीय जैन समाज, बड़ा मन्दिर व गुरुकुल समस्त स्टाफ एवं बच्चों ने भी सभी कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। परम पूज्य गुरुवर श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि बचपन में हमारे पास समय तो होता है परन्तु ज्ञान नहीं होता। यौवन में ज्ञान होता है पर समय नहीं होता और वृद्धावस्था में समय भी होता है और ज्ञान भी परंतु स्वास्थ्य नहीं होता। जिसके चलते हम धर्म, ध्यान करने में असमर्थ हो जाते हैं। युवा अगर थोड़ा समय धर्म को दे तो उसका जीवन सुखमय हो जायेगा। आज के विधान का विसर्जन रेणू जैन, रजनीश चंद जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन निर्मल जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन टीना जैन, सुमत प्रसाद जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन अंजू, शानू द्वारा किया गया। प्रश्न मंच के पश्चात उपस्थित विजेताओं को कविता जैन महावीर प्रसाद की ओर से पुरस्कार प्रदत्त किये गये। मुकेश जैन, सुभाष, राजीव, मनोज, प्रेम जैन आदि का विशेष सहयोग। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल कुमार, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, विधान संयोजक मोतीलाल, अरुण, देवेंद्र कुमार, सजय जैन का विशेष सहयोग रहा।
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