गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी में स्वामी समर्पणानंद वैदिक शोध संस्थान द्वारा शनिवार को एक दिवसीय वैदिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय उपनिषदों में विविध विद्याएं रहा। गोष्ठी में प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आये विद्वानों ने हिस्सा लिया।
गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी में आयोजित एक दिवसीय वैदिक संगोष्ठी का शुभारंभ आश्रम के ब्रह्मचारियों द्वारा सरस्वती वंदना और वैदिक गीत से किया गया। इसके बाद संगोष्ठी में आए विद्वानों का ब्रह्मचारियों ने वैदिक रीति से स्वागत किया। गोष्ठी में राजश्वेर प्रसाद मिश्र ने शोध पढ़ते हुए उपनिषद् में विवेचित लगभग विद्याओं का परिचय प्रस्तुत किया। जिसमें मधु विद्वाया, दहरविद्वाया, पंचाग्निविद्वया आदि प्रमुख हैं। प्रोफेसर कन्हैयालाल पाराशर ने अपने शोध में आधुनिक विज्ञान पर प्रकाश डाला। ललित कुमार गौड़ ने उपनिषदों में भेदाभेद उपासना का वर्णन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शारदा शर्मा ने ब्रह्मविद्वाया प्राप्ति के साधनों पर प्रकाश डाला। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मान सिंह ने उपनिषद् का व्यापक अर्थ समझाया। गोष्ठी में दिल्ली, लखनऊ, आगरा , कुरुक्षेत्र, मेरठ, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़ आदि से आए विद्वानों और छात्रों ने शोध प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में गुरुकुल प्रभात आश्रम के कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा को विश्व की सर्वोत्तम भाषा बताते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन आदि देेशों में संस्कृत भाषा के लिए काम किया जा रहा है।