मेरठ। यूनाइटेड ज्वैलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (यूजेएफ) ने मंगलवार को नील गली सराफा बाजार में आयोजित बैठक में बीआईएस द्वारा जारी सर्कुलर का विरोध किया गया है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बीआईएस द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार स्वर्ण के 83.30 प्रतिशत शुद्धता वाले हस्तशिल्पियों की कला से निर्मित जेवर हॉलमार्क नहीं होंगे। भारत सरकार द्वारा 916, 75.00 व 58.50 को ही मान्यता प्राप्त है। पदाधिकारियों ने इस सर्कुलर का विरोध जताते हुए कहा कि मेरठ में करीब एक लाख से अधिक हस्तशिल्पी काम करते हैं। देश में इनकी संख्या करीब दो करोड़ है। यह जेवर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, बंगाल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू और कोयम्बटूर में बनते हैं। विदेशों को 83.33 प्रतिशत जेवर का निर्यात किया जाता है। जिसमें कुल 18 प्रतिशत गोल्ड ज्वैलरी का होता है।
83.33 हॉलमार्क की ज्वैलरी बंद होने से इस हस्तकला के करोड़ों कारीगरों पर प्रभाव पड़ेगा। वर्ष 2013-14 में ज्वैलरी सेक्टर का कुल निर्यात 43.05 बिलियन डॉलर था जोकि अब मात्र 30.67 बिलियन डॉलर रह गया है। कुल टर्नओवर में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। जिससे कि सारा व्यापार अस्त-व्यस्त हो गया है। पदाधिकारियों ने कहा कि अगर ये 20 कैरेट 83.33 का जेवर पुन: हॉलमार्क पास नहीं किया गया तो कारीगर भुखमरी की स्थिति में आ जाएंगे। यूजेएफ के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार अग्रवाल ने कहा कि 83.33 हॉलमार्क करने का नियम खत्म न किया जाए। दूसरा हॉलमार्क नियम रजिस्ट्रेशन फीस 46 हजार और जीएसटी बहुत ज्यादा है। जबकि मेरठ जिले से लगे मोदीनगर और गाजियाबाद में यह 25 सौ और जीएसटी है। यह फीस कम की जाए। बैठक में आशीष मित्तल, विपिन अग्रवाल, कोमल वर्मा, अशोक रस्तोगी, वीरेंद्र जैन, ईनाम अली, सिराजुल इस्लाम, नफीस, अखंड प्रताप सिंह, गौरव कुमार, राकेश बंगाली, रवि कुमार आदि मौजूद रहे।