डैमेज कंट्रोल के लिए गैर दलित सिपहसालारों को टारगेट
मेरठ।
दो अप्रैल के उपद्रव के बाद वेस्ट के कई जिलों में पस्त पड़ी बसपा में जान फूंकने के लिए गैर दलित सिपहसालारों को उतारने की तैयारी की जा रही है। खास तौर से मुस्लिम पदाधिकारियों को इस बाबत जिम्मेदारी देने की योजना बन रही है, ताकि इस प्रकरण के बाद हुए राजनीतिक नुकसान से बसपा खुद को उबार सके।
दो अप्रैल को जो उपद्रव हुआ, उसमें अब तक सबसे बड़ा नुकसान बसपा को दिखाई दे रहा है। मेरठ की बात करें तो यहां बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा को पुलिस जेल भेज चुकी है। इसके अलावा जोन कोऑर्डिनेटर सुनील जाटव, मंडल कोऑर्डिनेटर दिनेश काजीपुर भी जेल में हैं। मुजफ्फरनगर में बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम तक को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। हापुड़ में भी यही हाल है। कुल मिलाकर इस पूरे प्रकरण में बसपाई पूरी तरह से पस्त हैं। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस बवाल के पीछे बसपा का हाथ रहा है। हालांकि बसपा आला कमान का कहना है कि पार्टी की भूमिका इस पूरे प्रकरण मेें नहीं रही। यहां तक भी कहा जा रहा कि दो अप्रैल के दिन भी वेस्ट यूपी प्रभारी के जरिए सभी को संदेश भिजवाया गया था कि कोई भी बसपाई इस विरोध में शामिल न हाें।
दो अप्रैल के बाद से बसपा बैकफुट पर है। यही कारण रहा कि आंबेडकर जयंती पर बसपा ने यहां कार्यक्रम करने से ही इंकार कर दिया जबकि हर बार बड़ा कार्यक्रम मेरठ के आंबेडकर कॉलेज में होता रहा है। कार्यकर्ताओं ने छोटी सी विचार गोष्ठी की। माल्यार्पण किया और बादलपुर में आयोजित कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए। पार्टी की अन्य गतिविधियां भी बिल्कुल ठप हैं। हैरत की बात यह है बसपा के दलित पदाधिकारी या कार्यकर्ता तो सामने आ ही नहीं रहे हैं पर गैर दलितों ने भी कोई खास पार्टी गतिविधियां अभी शुरू नहीं की है।
पार्टी की गतिविधियां जिंदा रखें
इस पूरे मामले में अब बसपा थिंक टैंक योजना बना रहा है कि गैर दलित बसपाइयों को आगे कर पार्टी की गतिविधियां शुरू कराई जाएं। मैसेज यह जा रहा कि बसपा मूर्छा में है। इसे तोड़ा जाए। पार्टी में वेस्ट यूपी प्रभारी शमशुद्दीन राइन हैं। उन्हें इस पर काम करने को कहा गया है। इसके अलावा अन्य हाजी याकूब कुरैशी, सतेंद्र सौलंकी, एमएलसी सुरेश कश्यप आदि को कहा जा रहा है कि पार्टी की गतिविधियों को जिंदा रखें।