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सत्यापन में खुली पोल, बिल्डरों ने किया विकास होल्ड

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सत्यापन में खुली पोल, बिल्डरों ने किया विकास होल्ड
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मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण ने सत्यापन कराया तो बिल्डरों की पोल खुल गई। पचास से ज्यादा ऐसी कालोनियां मिलीं, जिन्हें एमडीए से स्वीकृत तो कराया गया। लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बिल्डरों ने बंधक बने प्लाट भी बेच डाले। एमडीए ऐसे बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर कर रिकवरी जारी करने की तैयारी कर रहा है।
शहर में 252 कालोनियां ऐसी हैं जिनके मानचित्र एमडीए द्वारा स्वीकृत कराए गए हैं। हालांकि इससे ज्यादा कालोनियां यहां अनाधिकृत रूप से डेवलेप हो गई हैं। अहम बात यह है कि स्वीकृत कॉलोनियों को बने भी कई साल हो गए हैं। लेकिन इन्हें नगर निगम को हैंड ओवर नहीं किया जा सका है। कारण, विकासकर्ताओं यानी बिल्डरों ने यहां काम ही पूरे नहीं कराए हैं। ऐेसे में निगम कालोनियां लेने को तैयार नहीं।
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लगातार मिल रही शिकायतों पर एमडीए ने कुल 190 कालोनियों का सर्वे कराया। सत्यापन कराने में यह सामने आया कि 50 प्रतिशत कालोनियां ही ऐसी हैं जो मानक के अनुसार विकसित हैं। 25 प्रतिशत कॉलोनियों की स्थिति बस संतोषजनक पाई गई। बाकी कॉलोनियां ऐसी हैं जहां विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। बिल्डरों ने नियमों की अवहेलना की। यही नहीं, कॉलोनाइजरों ने आवंटित क्षेत्रफल से ज्यादा जमीन पर कालोनी डेवलेप कर दीं।
बंधक प्लाट तक बेच डाले
मानचित्र स्वीकृत करते समय एमडीए कॉलोनियों में कुछ प्लाट बंधक रखता है ताकि इन्हें बेचकर कॉलोनियों में विकास करा सके। काफी बिल्डरों ने ऐसे प्लॉट भी बेच डाले। इनमें एमडीए अधिकारियों की भी सेटिंग रही। बैंक गारंटी तक एक्स्पायर हो गईं जिन्हें रिन्युअल ही नहीं कराया गया।
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अब होगा एक्शन
एमडीए के वीसी साहब सिंह ने बताया कि ऐसे विकासकर्ताओं पर अब एक्शन होगा। या तो वे विकास कार्य पूरा करेंगे नहीं तो उनके खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। इसके अलावा अवशेष बकाए को भू राजस्व की भांति वसूल किया जाएगा। जिन्होंने ज्यादा जमीन कब्जाई है, वहां ध्वस्तीकरण होगा। सभी कॉलोनियों की मानचित्र पत्रावली का अवलोकन कर समीक्षा की जाएगी।

खास बातें
- एमडीए ने कराया 190 कालोनियों का सत्यापन, 50 कालोनियों में मिला गड़बड़झाला
- बिल्डरों ने नहीं कराया कॉलोनियों में काम, बंधक प्लाट भी बेच डाले, होगी एफआईआर
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