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राष्ट्रोदय के जरिये जातियों और खाप को साधने की कवायद

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राष्ट्रोदय के जरिए जातियों और खाप को साधने की कवायद
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मेरठ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक सोच और मकसद के साथ राष्ट्रोदय के आयोजन में जुटा है। विशाल स्तर पर होने वाले इस स्वयंसेवक समागम के जरिए संघ परिवार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ को और ज्यादा मजबूत बनाने के साथ ही अपनी संस्कृति और सोच से समाज को अवगत कराना चाहता है। इसी मिशन पर काम करते हुए पहली बार सभी जातियों, खाप, सामाजिक संगठन आदि के प्रमुखों को संघ परिवार ने इस राष्ट्रोदय में आमंत्रित किया है।
आरएसएस का दायरा लगातार बढ़ रहा है। स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ने के साथ ही शाखाओं की संख्या भी बढ़ रही है। लेकिन इन सबके बीच संघ को लेकर गैर भाजपाई दल लगातार अंगुलियां उठाते रहे हैं। ऐसे में संघ परिवार ने इसका तोड़ निकालने के लिए एक सधी हुई सोच के साथ राष्ट्रोदय में योजना तैयार की है। इस विशाल आयोजन के जरिए एक तरफ जहां सवा तीन लाख स्वयंसेवकों को शाखा विस्तार और राष्ट्रीयता का संदेश दिया जाएगा। वहीं, इस कार्यक्रम में गैर संघी लोगों को भी आमंत्रित किया गया है।
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ऐसा पहली बार हो रहा है कि संघ के कार्यक्रम में साधु संतों के साथ ही सभी धर्म और वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। इनमें जातीय संगठन, सामाजिक और स्वयंसेवी संगठन आदि के पदाधिकारियों को बुलाया गया है। ताकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसके नेतृत्व व स्वयंसेवकों को लेकर जो बयान आते रहते हैं, उसको प्रत्यक्ष रुप से ये लोग देखकर अपने कार्यकर्ताओं को बता सकें।
संघ प्रमुख का संबोधन और स्वयंसेवकों क्रियाकलाप पर नजर
आरएसएस के सरसंघ चालक डॉ. मोहनराव भागवत का संबोधन और स्वयंसेवकों की क्रियाओं के बीच अनुशासन के प्रदर्शन के जरिए संघ परिवार बताना चाहता है कि संघ का वास्तविक मकसद क्या है। क्योंकि संघ परिवार हमेशा ही अराजनैतिक होने का दावा करता रहा है। संघ नेताओं के संबोधन में भी कभी राजनीतिक बातें शामिल नहीं रही। देश की एकता और अखंडता के साथ देश की सुरक्षा और सामाजिक रूप से मजबूती और जातीय भेदभाव को दूर करने की बातें ही संघ नेता अपने संबोधन में करते रहे हैं। इस संबोधन में सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे ही अहम होते हैं। वहीं, दूसरी तरफ स्वयंसेवकों का अनुशासन और उनके द्वारा किए जाने वाले शारीरिक आदि के प्रदर्शन से भी संघ परिवार अपने संगठन की सोच को साझा करना चाहता है।
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पश्चिमी की भूमि पर विस्तार की कवायद
उत्तर प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा अहम है। पिछले कुछ समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक मतभेदों के बीच जातीय मतभेद भी तेजी से उभरे हैं। जो कहीं न कहीं संघ के राजनीतिक संगठन भाजपा के लिए घातक हो सकते हैं। ऐसे में संघ परिवार इन मतभेदों को पाटने के लिए इस कार्यक्रम के जरिए तमाम जातियों के मुखियाओं के जरिए अपनी सोच प्रदर्शित कर पैठ बनाना चाहता है। इसलिए इस कार्यक्रम को जहां विशालता के साथ भव्य रूप दिया गया है, तो पहली बार बाहरी लोगों को भी खुला निमंत्रण दिया गया है।


खास बातें
संघ नेतृत्व ने राष्ट्रोदय में सभी जातीय संगठनों के प्रमुखाें को किया विशेष निमंत्रित
इन नेताओं को संघ दिखाना चाहता है अपनी संस्कृति और सोच
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