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चोटी बेधक रोग के फेर में पोक्खा बोइंग रोग का शिकार हो रहा गन्ना
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गन्ने को कीट नाशक की जगह होती है फफूंदी नाशक की आवश्यकता
राजदीप जाखड़
मेरठ।
सर्वाधिक उपज और चीनी उत्पादन में देश में प्रदेश का नाम रोशन करने वाला गन्ना ‘पोक्खा बोइंग’ (फंफूदी) नामक रोग से ग्रसित होने लगा है। गन्ने की फसल में लगा यह रोग गन्ना विभाग और किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। किसान इस रोग को चोटी बेधक रोग मानकर कीटनाशक का प्रयोग कर रहे हैं जबकि पोक्खा बोइंग को खत्म करने के लिए फफूंद नाशकों की जरूरत होती है। गन्ना विभाग की तरफ से किसानों को न केवल जागरूक किया जा रहा है बल्कि इस रोग से निपटने के टिप्स भी दिए जा रहे हैं।
किसानों की मेहनत और गन्ना विभाग की देखरेख से प्रदेश में इस साल गन्ने की औसत पैदावार 79.17 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हुई है। यह राष्ट्रीय औसत से अधिक है। पिछले साल के मुकाबले गन्ना उत्पादन में 156 लाख टन की वृद्धि हुई है। इस कारण 17 लाख टन चीनी का अतिरिक्त उत्पादन हुआ है। बढ़ती पैदावार और कैश क्रॉप के चलते इस साल भी सर्वेक्षण में गन्ने के रकबे में बढ़ोतरी के रुझान मिल रहे हैं। लेकिन गन्ने की फसल में लग रहे पोक्खा बोइंग रोग ने किसानों से लेकर गन्ना अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
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चोटी बेधक के भ्रम में फंस रहे किसान
त्रिवेणी ग्रुप शुगर मिल सहारनपुर के जीएम केन डॉ. बीएस तोमर ने बताया कि पोक्खा बोइंग रोग गन्ने की फसल में एक महामारी का रूप ले रहा है। चोटी बेधक रोग और पोक्खा बोइंग रोग के लक्षण करीब-करीब एक जैसे होते हैं। दोनों ही रोगों में पौधे की पत्तियां उलझी हुई दिखाई देती हैं। किसान इस भ्रम में रहकर चोटी बेधक रोग का उपचार कीटनाशकों से करने लगते हैं जबकि पोक्खा बोइंग रोग में फफूंदी नाशक की जरूरत होती है।

ये है पोक्खा बोइंग रोग की पहचान
- सर्वप्रथम खेत में पौधों की पत्तियां उलझी हुई दिखाई पड़ती हैं।
- पत्तियों पर सिकुड़न जैसे निशान बन जाते हैं।
- बीच की गोफ पीली होकर रस्सी जैसी दिखाई पड़ती है।
- बीच की गोफ व साथ वाली पत्तियां जली सी दिखाई पड़ती हैं।
- अगोला पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है, जिसे टोप रोट भी कहते हैं।
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रोग को नियंत्रित करने के उपाय
डॉ. बीएस तोमर ने बताया कि कॉपर ऑक्सी क्लोराइड या डाइथेन एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर पानी या कार्बडाजिम 0.1 प्रतिशत (1 ग्राम/लीटर पानी) के कम से कम दो छिड़काव करें। या फिर कोनिका 250 ग्राम, मैजिक स्प्रे 700 ग्राम प्रति एकड़ पर्णीय छिड़काव करें। या कोनिका 250 ग्राम, सुपर मैजिक 3 किलोग्राम, यूरिया 25 किलोग्राम प्रति एकड़ सिंचाई के बाद प्रयोग करना लाभदायक होता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कुछ क्षेत्रों में गन्ने की फसल में पोक्खा बोइंग रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। गन्ना विभाग के अधिकारी गोष्ठी के माध्यम से किसानों को जागरूक कर रहे हैं। साथ ही रोग पर नियंत्रण करने की जानकारी भी दे रहे हैं।
हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त, मेरठ परिक्षेत्र
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