नगर पालिका चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद पार्टी के विभीषणों पर अब निगाह है। पार्टी सूत्रों के अनुसार चुनाव में बागियों का साथ देने वालों की सूची तैयार कर कार्रवाई के लिए पार्टी हाईकमान को भेज दी गई है।
बीते डेढ़ दशक तक मवाना नगर पालिका में काबिज रही भाजपा को इस बार करारी हार का मुंह देखना पड़ा है। इसका कारण पार्टी में टिकटों के बंटवारे को लेकर हुआ विद्रोह माना जा रहा है। जहां कई लोग टिकट के लिए उम्मीद लगाए थे, जब उनको टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय होकर चुनाव मैदान में उतरे और पार्टी के खिलाफ ही बिगुल फूंक दिया।
अध्यक्ष पद पर अशोक चौधरी पार्टी टिकट के दावेदारों में से थे। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी से बागी होकर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा। मतदान से पहले तक पार्टी के कई दिग्गजों ने अशोक चौधरी को मनाने का प्रयास किया था। नहीं मानने पर जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा ने अशोक चौधरी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अशोक चौधरी ही ऐसे नहीं थे जिन्होंने पार्टी के खिलाफ बिगुल बजाया हो, कई वार्डों में भी यही हालात थे। इसी कारण इस बार भाजपा को मात्र 7 वार्डों में जीत मिली। अब ऐसे विभीषणों पर पार्टी नेताओं की निगाह है। नगर में चर्चा है कि ऐसे चार सौ लोगों की सूची बनाकर पार्टी हाईकमान को कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इस संबंध में भाजपा नगर अध्यक्ष सुभाष दीक्षित का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या नहीं है। हालांकि उन्होंने संख्या का खुलासा नहीं किया परंतु इतना ही बताया कि सूची भेज दी गई है।
मुख्य बातें
नगर पालिका चुनाव में करारी हार के बाद उठाया कदम
सूची में चार सौ कार्यकर्ताओं का नाम शामिल होने की चर्चा