क्षेत्र के कांग्रेसियों के लिए एक दिसंबर स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया। वहीं, सपा के लिए गलती का अहसास करने वाले दिन के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया है। कांग्र्रेस को चार दशक बाद नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी हाथ लगी है। यह कांग्रेस पार्टी के लिए किसी लाटरी से कम नहीं है।
नवनिर्वाचित चेयरमैन अय्यूब कालिया ने नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर बसपा का दामन छोड़ दिया था। उनको उम्मीद थी कि सपा नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाएगी। बीते दो दशक से कभी वे स्वयं तो कभी पत्नी को नगर पालिका में सभासद पर काबिज होकर जनता की सेवा करते रहे। स्थानीय निकाय चुनाव के प्रत्याशियों की घोषणा हुई तो सपा ने अय्यूब कालिया के बजाय दीपक गिरी को प्रत्याशी बनाया। जिसको लेकर तहसील में नामांकन कराने आए जिलाध्यक्ष के सामने हंगामा भी हुआ। सपा से टिकट नहीं मिलने पर अय्यूब कालिया कांग्रेस का दामन थाम चुनाव मैदान में कूद पडे़। उन्होंने कांग्रेस के सहारे अपनी नैया पार लगाने की रणनीति बनाई।
बीते दो दशक से जनता के बीच काम कर रहे अय्यूब कालिया को उनके व्यवहार और काम तथा भाजपा की अंतर्कलह का लाभ मिला। उन्होंने पूरे जिले में एकमात्र यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली है। हालांकि सपा प्रत्याशी दीपक गिरी 1093 मत पाकर सातवें नंबर पर रहे। वह जमानत तक नहीं बचा सके। कांग्रेस नेता राजेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 1971 से 77 तक पं. चेतराम शर्मा चेयरमैन पद को सुशोभित कर चुके हैं। वे कांग्रेसी थे। अब 40 साल बाद फिर से कांग्रेस को चेयरमैन पद पर जीत हासिल हुई है।
मुख्य बातें
टिकट नहीं मिलने पर अंतिम समय में सपा छोड़कर कांग्रेस में आए थे नवनिर्वाचित चेयरमैन
सपा प्रत्याशी जमानत बचाने में रहे नाकाम, भाजपा को ले डूबी अंतर्कलह