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चार्जशीट से साक्ष्य गायब करने पर विवेचकों पर केस

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मेरठ। पहले जानलेवा हमले की धारा हटाने के लिए जद्दोजहद और अब चार्जशीट से साक्ष्य गायब कर दिए गए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने बागपत में तैनात पुलिस के दो दरोगाओं की भूमिका संदिग्ध मानते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार दोपहर तक मुकदमे की प्रति तलब की है। कंकरखेड़ा थाने में दोनों दरोगाओं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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कंकरखेड़ा क्षेत्र के डिफेंस एंकलेव निवासी तेजपाल सिंह ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। जिसमें बताया था कि आठ मई 2011 को उनकी पुत्री की शादी बदरपुर दिल्ली निवासी अरुण कुमार पुत्र वीरसेन से की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही बेटी को ससुराल वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। 12 अक्तूबर 2013 को ससुराल वालों ने बेटी को पीटकर घर से निकाल दिया था। जिसके बाद कंकरखेड़ा थाने में जानलेवा हमले का मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
पुलिस ने जांच के दौरान पहले यह धारा हटा दी। लेकिन अधिकारियों से शिकायत करने पर दोबारा जानलेवा हमले की धारा बढ़ा दी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी के आदेश पर इस मुकदमे की विवेचना बागपत ट्रांसफर कर दी थी। जिसकी विवेचना दरोगा धर्मेंद्र पंवार व सतीश कुमार ने की।
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आरोप है कि विवेचकों ने चार्जशीट गायब कर दूसरी चार्जशीट में से साक्ष्य हटा दिए। जिस पर सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने की अर्जी डाली गई थी, जोकि खारिज हो गई थी। जिला जज के आदेश पर सीजेएम ने पुन: सुनवाई की। जिसमें थानाध्यक्ष कंकरखेड़ा को निर्देश दिए कि दरोगा धर्मेंद्र पंवार व सतीश कुमार पर केस दर्ज कर उसकी प्रति 24 घंटे में कोर्ट में भेजी जाए। इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा पीपी सिंह ने बताया कि दोनों दरोगाओं पर केस दर्ज कर लिया गया है।
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खास बात
- कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कर उसकी प्रति प्रस्तुत करने को कहा
- जानलेवा हमले की धारा हटाने को लेकर चल रही जद्दोजहद
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