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रामराज गन्ना समिति में इंडेट के फर्जीवाडे को लेकर किसानो का जमकर हंगामा

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बहसूमा।
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रामराज गन्ना समिति के वैंडर द्वारा इंडेंट में धांधली कर गन्ना माफिया को पर्ची जारी करने से नाराज किसानों के सब्र का बांध सोमवार को टूट गया। इससे गुस्साए किसानों ने हंगामा कर दिया। इसकी सूचना पाकर पहुंचे मिल अधिकारियों को भी गुस्सा झेलना पड़ा। वे मिल अधिकारियों द्वारा नियमानुसार इंडेंट जारी करने के आश्वसान पर शांत हुए। उन्होंने वैंडर को तत्काल हटाने तथा डीसीओ को मौके पर बुलाने की मांग की। घंटों चले हंगामे के बावजूद डीसीओ मौके पर नहीं पहुंचने पर किसानों ने मुख्य मार्ग पर धरना शुरू दिया। वहीं, डीएम से फोन पर हुई वार्ता के बाद तत्काल डीसीओ को मौके पर भेजने के आश्वासन पाकर किसान वापस समिति परिसर में धरने पर बैठ गए। शाम लगभग चार बजे किसानों के बीच पहुंचे डीसीओ को बंधक बना लिया। काफी देर चली गहमा हमी के बाद डीसीओ द्वारा तीन दिन में सभी खामियों को दुरुस्त करने का आश्वासन दिया। इस पर किसान शांत होकर घरों को लौटे।
रामराज गन्ना समिति से 84 गांवों के 14 हजार किसान जुडे़ हैं। किसानों कानेतृत्व कर रहे राजेंद्र सिंह, कैप्टन सुभाष और वीरेंद्र सिंह का आरोप है कि समिति पदाधिकारियों की सहमति से वैंडर ने गन्ना माफिया की फर्जी बांड, फर्जी इंडेंट से पर्ची जारी कर दी। जिससे आम किसानों को पर्ची नहीं मिल रही हैं। इस कारण किसानों की गेहूं की बुआई भी प्रभावित हो रही है। इस पर किसान सोमवार सुबह रामराज गन्ना समिति में एकत्र हुए तथा वैंडर को तत्काल हटाने की मांग कर हंगामा करना शुरू कर दिया। सचिव की अनुपस्थिति से किसानों का गुस्सा और भड़क गया।
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इस पर किसानों ने समिति कर्मचारियों ने बंधक बना लिया। हंगामे की सूचना पाकर मिल के डीजीएम लेखपाल सिंह एवं गन्ना प्रबंधक पवन जैनर किसानों के बीच पहुंचे तो किसानों ने उन पर आरोप लगाए। कहा कि मिल प्रबंधन की मिलीभगत से किसानों का इंडेंट नियमानुसार नहीं भेजा जा रहा है। मिल अधिकारियों ने तर्क दिया कि गन्ना पेराई के हिसाब से पूरा इंडेंट जारी किया जा रहा है। समिति के वैंडर द्वारा गन्ना माफिया की साठगांठ से फर्जी इंडेंट जारी किया जा रहा है। किसानों ने फर्जी बांड के सबूत भी दिए। इस पर किसान डीसीओ को मौके पर बुलाने की मांग करने लगे। घंटों तक जब डीसीओ ओमप्रकाश यादव किसानों के बीच नहीं पहुंचे तो उन्होंने रामराज मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। इससे कुछ ही देर में सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। किसानों ने डीएम से फोन पर वार्ता की। उन्होंने डीसीओ को तत्काल मौके पर भेजने के आश्वासन देकर किसानों को शांत किया। इस पर किसान वापस गन्ना समिति पहुंच गए। किसानों के बीच शाम को लगभग चार बजे डीसीओ ओमप्रकाश यादव पहुंचे तो उनसे जमकर गहमागहमी हुई। डीसीओ पर किसान भड़क गए। किसानों ने डीसीओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा तुरंत वैंडर को हटाने की मांग पर अड़ गए। डीसीओ ओमप्रकाश यादव ने तीन दिन में वैंडर को बदलने तथा बेसिक कोटा पूरा करने, जांच में दोषी पाये जाने पर वैंडर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आश्वासन दिया। इस पर किसान शंात होकर घरों को लौट गए। हंगामा करने वाले किसानों में वीरेंद्र, राजेंद्र सिंह, कैप्टन सुभाष, अशोक प्रधान, रविंद्र, सुरेंद्र मुखिया, प्रधान धर्मेंद्र फौजी, विजयपाल, सचिन प्रधान, सुंदर सिंह, हरेंद्र सिंह आदि समेत हजारों किसान मौजूद रहे।
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कोटे से अधिक गन्ना आपूर्ति
बहसूमा। किसानों ने एक सूची ऐसी दी जिसमें बेसिक कोटा से भी अधिक गन्ना आपूर्ति हो चुकी है। ऐसे गन्ना माफिया की सूची भी प्रस्तुत की है। जिन्होंने बेसिक कोटा लगभग पहले ही हफ्ते में पूरा कर दिया है। उनको बेसिक कोटे से भी अधिक इंडेंट जारी कर दिया है। कृषक कोड सात का बेसिक कोटा 99 कुंतल है तथा उसकी 105 कुंतल की सप्लाई हो चुकी है। ऐसे सैकड़ों किसानों की सूची अधिकारियों के समक्ष रखी। जिस पर अधिकारियों के पास जवाब नहीं है। अधिकारियों ने सूची की जांच कराकर ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
मुख्य बातें
इंडेंट के मुताबिक गन्ना पर्चियां जारी नहीं करने पर सड़क पर उतरे किसान
जिलाधिकारी के आश्वासन पर पहुंचे डीसीओ से किसानों की हुई गर्मागर्मी
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