संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। नगर की करीब डेढ़ सौ वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा इस बार भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। सरधना का ऐतिहासिक बूढ़ा बाबू मेला तय समय पर आयोजित नहीं हो सका है। आयोजन स्थल को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच सहमति नहीं बन पाने से मेले पर संशय बरकरार है। अब प्रस्तावित नगर पालिका बोर्ड बैठक के बाद ही मेले के भविष्य पर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
बूढ़ा बाबू मेला वर्षों से सरधना की पहचान, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक रहा है। मेले से स्थानीय व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और आसपास के ग्रामीणों की आर्थिक गतिविधियां भी जुड़ी रहती हैं लेकिन लगातार दूसरे वर्ष समय पर आयोजन न होने से नगरवासियों में निराशा है। पूर्व में हुई बोर्ड बैठक में मेला मंडी परिसर में कराने का प्रस्ताव पारित किया गया था। नगर पालिका चेयरपर्सन सबीला बेगम ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर प्रस्तावित स्थल को स्वीकृति देने का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिल सकी है।
अधिशासी अधिकारी दीपिका शुक्ला ने चेयरपर्सन को पत्र भेजकर मेला स्थल शीघ्र तय कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि आयोजन स्थल निर्धारित होने के बाद ही सुरक्षा, सफाई, पेयजल, विद्युत और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय से कराई जा सकेंगी। उधर, मेला स्थल को लेकर सभासदों में भी मतभेद बने हुए हैं। कुछ मंडी परिसर में आयोजन के पक्षधर हैं, जबकि कई सभासद और नगरवासी मेले को उसके पारंपरिक स्थल पर ही आयोजित कराने की मांग कर रहे हैं।
चेयरपर्सन सबीला बेगम ने कहा कि बूढ़ा बाबू मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सरधना की सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था का प्रतीक है। शासन से स्पष्ट निर्देश मांगे गए हैं। होने वाली बोर्ड बैठक में सभी सभासदों की राय लेकर निर्णय किया जाएगा। इसके बाद जनभावनाओं के अनुरूप शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।