विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष----------
- सामान्य से कई गुणा बढ़ गया प्रदूषण
- मानक से अधिक प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरा
- बेगमपुल और केसरगंज सेे लिया जाता है सैंपल
मोहित कुमार----------
मोदीपुरम।
शहर की हवा में प्रदूषण का जहर घुल रहा है। आबो हवा में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। शहर में साल दर साल प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। यह स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े देखें तो पिछले सात साल में करीब 45-50 प्रतिशत तक प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। वातावरण में आरएसपीएम की मात्रा बढ़ने से बीमारियां फैल सकती हैं।
शहर में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के साथ वाहनों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। हालात यह है कि शहर में प्रदूषण की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है। इससे रोकने में सरकारी मशीनरी फैल हो रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बेगमपुल और केसरगंज से हर माह लिए गए नमूनों की मानीटरिंग की जा रही है। नमूनों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सात साल के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदूषण की मात्रा हर साल बढ़ी है। वातावरण में (आरएसपीएम रेसपरेबल सस्पेडिंड पर्टीकुलेट मैटर) की मात्रा बढ़ती जा रही है। वर्ष 2011 में आरएसपीएम की मात्रा 124.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई थी जो वर्ष 2017 में बढ़कर 177.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गई। जबकि अन्य महीनों में यह 190 तक भी पहुंच चुका है। सामान्य स्थिति में यह 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। सबसे अधिक खराब स्थिति बेगमपुल और केसरगंज क्षेत्र में दर्ज हो रही है।
बेगमपुल पर आंकड़ों की स्थिति
वर्ष - आरएसपीएम
2011 - 124.3
2012 - 130.0
2013 - 140.0
2014 - 162 .8
2015 - 169.2
2016 171.9
2017 177.18
मानक 60 है आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में है
केसरगंज पर प्रदूषण की स्थिति
वर्ष आरएसपीएम
2011 90.9
2012 110.7
2013 119.9
2014 123.5
2015 128.1
2016 127.8
2017 135.62
मानक 60 है आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में है।
ध्वनि प्रदूषण (डेसिबल में)
व्यवासयिक क्षेत्र मानक 55
बेगमपुल 81.5
रेलवे रोड 67.6
आबूलेन 65.2
दौराला क्रासिंग 62.2
आवासीय कालोनी मानक 45
थापरनगर 81.7
शास्त्रीनगर 77.2
पल्लवपुरम 70.4
अतिसंवेदनशील क्षेत्र मानक 40
कैंट अस्पताल 56.8
डीएम ऑफिस 66.8
औद्योगिक क्षेत्र मानक 75
परतापुर एरिया-- 75.4
रिठानी एरिया-- 68.2
दौराला आर्गेनिक एरिया-- 66.9
(नोट : आंकड़े क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय मोदीपुरम से लिए गए हैं।)
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है प्रदूषण
तेजी से बढ़ता प्रदूषण शहरवासियों को रोगी बना रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के वैज्ञानिकों के अनुसार आरएसपीएम की मात्रा अधिक होने से सबसे अधिक सांस संबंधी रोग बढ़ रहे है। सांस लेते समय वातावरण में घुले आरएसपीएम फेफड़ों में चले जाते हैं। इससे कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। त्वचा संबंधी रोग भी प्रदूषण के कारण फैलते हैं। दमा और सांस के मरीजों को उन स्थानों पर सांस लेने में अधिक परेशानी होने लगती है जहां वातावरण में आरएसपीएम की मात्रा अधिक होती है।
क्या है जल प्रदूषण की स्थिति
जनपद में जल प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है। काली नदी के प्रदूषण से दौराला ब्लाक के दर्जनों गांवों का पानी खराब हो गया है। इनसे दर्जनों लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। औद्योगिक इकाइयों का पानी भी शहर के जल को खराब कर रहा है। हालात यह है कि अभी तक जल प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। काली नदी पर हालात अभी तक नहीं सुधरे है। इसे लेकर प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी गंभीर नहीं है।
अप्रैल 2016 से अप्रैल 2017 में ऐसे बढ़ा आरएसपीएम
माह आरएसपीएम
अप्रैल 181.4
मई 186.7
जून 190.3
जुलाई 188.3
अगस्त - 175.6
सितंबर 178.4
अक्तूबर 190
नवंबर 180.5
दिसंबर 173.9
जनवरी 161.4
फरवरी 158.2
मार्च 161.2
अप्रैल 164.5
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वर्जन..........
शहर में प्रदूषण की रोकथाम के लिए डीजल वाहनों पर रोकथाम जरूरी है। सबसे अधिक प्रदूषण डीजल वाहनों से ही बढ़ता है। यहां सीएनजी के वाहनों का प्रयोग करना होगा। प्रदूषण विभाग हर माह शहर में प्रमुख स्थानों पर नमूने लेकर जांच कर रहा है। सीएनजी के लिए शासन को भी अपनी रिपोर्ट भेज रखी है। -अतुलेश यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी