364 करोड़ रुपये से लगेगा नालों के पानी को साफ करने वाला प्लांट
200 एमएलडी होगी क्षमता, प्रोजेक्ट तैयार, टेंडर के लिए जल निगम में कंपनियां कर रहीं आवेदन
नालों का पानी साफ होकर ही गंगा में गिरेगा, दो साल में बनकर तैयार होगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
राजकुमार सैनी
मेरठ। सीवर के पानी को ही नहीं, बल्कि अब नालों में बहने वाले गंदे पानी को भी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किया जाएगा। इसके लिए जल निगम ने 364 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है। विदेशी तकनीक से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे।
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा योजना के तहत शहर के नालों में बहने वाले पानी को साफ करने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। परियोजना पर गौर करें तो तीन साल बाद शहर के नालों से गंदा पानी काली नदी तक नहीं पहुंच पाएगा। इससे पहले ही यह पानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ होगा। उसके बाद काली नदी में स्वच्छ पानी पहुंचेगा, जिसका उपयोग खेतों की सिंचाई में किया जा सकेगा।
गंगा को दूषित होने से बचाने की मुहिम
सरकार गंगा को और दूषित होने से बचाने के लिए योजना चला रही है। अगर नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचने वाले गंदे पानी को पहले ही एसटीपी में साफ कर दिया जाए, तो गंगा के साथ यमुना का पानी भी स्वच्छ हो सकेगा।
दो साल में बनकर तैयार होगा एसटीपी
काली नदी किनारे 72 एमएलडी क्षमता के एसटीपी के बराबर में ही नया 200 एमएलडी का प्लांट लगाया जाएगा। 72 एमएलडी सीवर प्लांट को जहां सीवर लाइन से जोड़ा जा रहा है। वहीं 200 एमएलडी क्षमता वाला प्लांट नाले से जुड़ेगा, जो दो साल में बनकर तैयार होगा। जल निगम ने अभी प्लांट को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। टेंडर लेने वाली कंपनी प्लांट का लेआउट तैयार करेगी। प्लांट बनाने वाली कंपनी ही संचालन करेगी। कंपनियों ने जल निगम में आवेदन कर दिए हैं।
आबूनाला वन पर बनेंगे छह छोटे एसटीपी
डोरली से निकलने वाले आबू नाला वन पर जगह-जगह लगभग छह स्थानों पर छोटे एसटीपी लगाए जाएंगे। इन सभी की क्षमता 14-14 एमएलडी होगी। इन प्लांटों को विदेशी तकनीक से लगाया जाएगा, जिससे कम जगह और कम बिजली की जरूरत होगी। विदेशी तकनीक अपनाने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्लांट से पहले कई स्थानों पर लगाए जाएंगे जाल
एसटीपी से पहले जगह-जगह नालों में लोहे के जाल लगाए जाएंगे, ताकि प्लांट तक गंदे पानी के साथ सिल्ट न पहुंच पाए। क्योंकि सिल्ट पहुंचने पर प्लांट संचालन में दिक्कत आएगी। इस सिल्ट को भी शहर से बाहर डलवाने की व्यवस्था की जाएगी।
वर्जन
200 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी शहर की सूरत बदल देगा। नालों के माध्यम से जो भूगर्भ जल दूषित हो रहा है, वह भी नहीं होगा। वायु प्रदूषण भी कम होगा। प्लांट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शीघ्र ही योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।
- रमेश चंद्र, परियोजना प्रबंधक जल निगम