- गन्ना आयुक्त ने बकायेदार मिलों को लगाई कड़ी फटकार
- मेरठ मंडल की मिलों पर 1700 करोड़ रुपये हो चुके बकाया
मेरठ। चुनावी साल में भी प्रदेश सरकार बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने में असफल साबित हो रही है। 14 दिन के अंदर भुगतान कराने के वादे पर आई सरकार को शुगर इंडस्ट्री लगातार असहज करती आ रही है। चालू पेराई सत्र में भी प्रदेश की शुगर मिलों पर 12 हजार करोड़ से ज्यादा का बकाया हो चुका है। मेरठ मंडल की मिलों पर भी 1700 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। मामले को लेकर गंभीर प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने इंडस्ट्री पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गन्ना आयुक्त ने इंडस्ट्री की बैठक में बकायेदार मिलों के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई।
भूसरेड्डी ने कहा कि जिन शुगर मिलों ने गत पेराई सत्र के बकाये का भुगतान कर दिया है वे चालू पेराई सत्र का भुगतान करना भी शुरू करें। जिन मिलों की सीसी लिमिट बनी है, वे मिलें लिमिट का पर्याप्त कैश लेकर किसानों को अविलंब भुगतान कर कार्रवाई से बचे। जिन चीनी मिलों की कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत नहीं है वे चीनी मिलें निर्धारित कोटे के अनुसार चीनी बिक्री कर उस बिक्री से प्राप्त धनराशि तथा बगास, शीरा एवं मैली से प्राप्त धनराशि का 85 फीसदी धन तत्काल एस्क्रो अकाउंट में डालना सुनिश्चित करें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि एस्क्रो अकाउंट में धन प्राप्त होते ही उसे आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से तुरंत किसानों के खातों में स्थानांतरित कराना सुनिश्चित किया जाए। उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र हरपाल सिंह ने बताया कि मंडल की मिलों पर चालू पेराई सत्र का करीब 1700 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। इसे दिलाने के लिए मिलों पर शिकंजा कसा जा रहा है।