कर्ज की आस पर धड़ाम हुए शहर के सात सपने
- कई अहम प्रोजेक्ट बजट के अभाव में अटके
- एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में भी रखे गए थे प्रस्ताव, नहीं बनी बात
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे और मेरठ बुलंदशहर हाईवे जैसे अहम प्रोजेक्टों से भले ही मेरठ ही मेरठ की कनेक्टिविटी दूसरे शहर से बेहतर हो जाएगी। लेकिन भीतरी विकास के सात अहम प्रस्ताव बजट की आस में ही धड़ाम हो गए हैं। एनसीआर बोर्ड तक में इन प्रस्तावों को रखा गया। लेकिन बात ही नहीं बन पाई। इनमें से कई प्रोजेक्ट तो ऐसे हैं जो बेहद महत्वपूर्ण हैं और शहर को इसकी जबरदस्त दरकार है।
इन दिनों मेरठ के चारों और तेजी से काम हो रहा है। खास तौर पर मेरठ से अन्य शहरों को जोड़ने वाले मार्गों को बनाया जा रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस वे, जिस पर तेजी से काम हो रहा है। डासना से मेरठ के बीच का अंतिम चरण है जिसे जल्दी पूरा करने के लिए एनएचएआई ने पूरी ताकत झोंक दी है। इसके अलावा मेरठ-बुलंदशहर हाईवे बन रहा है तो मेरठ से बागपत होते हुए सोनीपत तक की कनेक्टिविटी भी बेहतर होने जा रही है। इसका बजट भी मंजूर हो गया।
....पर इन सतरंगे सपनों को लगा ग्रहण
इन प्रोजेक्टों के अलावा सात ऐसे अहम प्रोजेक्ट मेरठ में तैयार किए गए थे, जो शहर की भीतर व्यवस्था को ठीक करने के लिए बेहद अहम थे। इनमें से किसी पर भी काम नहीं हो पाया और ये सपना ही बने हैं।
1. मल्टीलेवल पार्किंग
इस प्रोजेक्ट पर काम होना शहर के लिए बेहद जरूरी है। शहर में हर समय जाम रहता है जिसका एक बड़ा कारण पार्किंग न होना। कई बार प्रोेजेक्ट बनाने के बावजूद एमडीए इस पर काम ही नहीं कर पाया। पहले घंटाघर पर इसका प्लान बना तो फिर आबू नाले पर। पहले तो जगह ही नहीं मिली और बाद में इसका पैसा बीस करोड़ रुपये भी दूसरे कामों में खर्च कर दिया गया। इसके लिए अवस्थापना से पैसा मांगा तो वहां से भी मना कर दिया गया।
2. इनर रिंग रोड
शहर में ट्रैफिक का प्रेशर घटाने के लिए चारों तरफ 34 किमी लंबी इनर रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव है। पहले चरण में 12 किमी रोड बनानी है। इसके लिए अभी तक जमीन का अधिग्रहण भी नहीं किया जा सका है। इतना जरूर हुआ कि लोहियानगर और जागृति विहार योजना डेवलप हुई तो चार किमी रिंग रोड बन गई। इसके लिए शासन से पैसा भी स्वीकृत नहीं हो पाया। 750 करोड़ रुपये का यह प्रस्ताव बना जो शासन ने मंजूर नहीं किया है।
3. आउटर रिंग रोड:
इसे एनएचएआई को बनाना था। बाहर जाने वाले ट्रैफिक को शहर की बजाय बाहर से निकालने के लिए 70 किमी की रोड प्रस्तावित है। लेकिन अभी तक इसका प्रस्ताव तक नहीं बनाया जा सका है। अब पीडब्ल्यूडी ने इसका 1116 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया। इस रकम को देने में शासन ने हाथ खड़े कर रखे हैं।
4. न्यू टीपी नगर:
न्यू टीपी नगर के लिए बागपत रोड पर 29 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना था। प्रशासन ने भू-अधिग्रहण के लिए 80 करोड़ रुपये की मांग की। लेकिन बात नहीं बनी। एमडीए ने पैसा नहीं दिया और यह प्रस्ताव खारिज हो गया है।
5. हथकरघा बाजार
साल के 11 महीनों में नौचंदी ग्राउंड में हथकरघा बाजार डेवलप करने का प्लान हवा में उड़ गया है। योजना यह थी कि एक माह मेला नौचंदी के लिए छोड़कर बाकी समय यहां हाट बाजार लगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
6. बस अड्डों की शिफ्टिंग
मेरठ में जाम का बड़ा सबब बस अड्डे बने हैं। दोनों अड्डे शहर के बीच में हैं। खास तौर पर भैसाली बस अड्डा नासूर बना है। इन्हें बाहर किया जाना था। दोनों के लिए शहर से बाहर जगह लेकर डेवलप होना था। लेकिन नहीं हो पाया। न जगह मिली न पैसा। ऐसे में शहर जाम से जूझ रहा है।
7. फ्लाईओवर
हापुड़ अड्डा व बेगमपुल पर फ्लाईओवर का प्लान भी धड़ाम हो गया है। दोनों ही जगह काम नहीं हो पाया। छह सौ करोड़ रुपये तो केवल बेगमपुल पुल के लिए ही चाहिए। इतनी ही रकम हापुड़ अड्डे के फ्लाईओवर के लिए चाहिए।
इन प्रस्तावों को नहीं मिला कर्ज
दिल्ली में हुई एनसीआर यूपी सेल की बैठक में एमडीए ने ये 7 प्रोजेक्ट पेश किए थे। इसमें इन सभी को कर्ज दिलाने की बात कही गई थी। कई प्रोजेक्टरों पर सहमति भी बनी थी। लेकिन इनमें से कई प्रोजेक्टों में एमडीए के पास जगह न होने के कारण कर्ज नहीं मिल सका। अन्य प्रस्तावों में अड़चन आ गई।
महंगे प्रोजेक्ट हैं
कई प्रस्तावों में हमने खुद ही पैसे का इंतजाम करने की कोशिश की थी और कई में कर्ज मांगा जो नहीं मिला। महंगे प्रोजेक्ट हैं। स्थानीय स्तर पर जिनमें काम हो सकता है, वहां कुछ काम किया, लेकिन बात नहीं बनी। -साहब सिंह, वीसी एमडीए
आज आएंगे नए वीसी
एमडीए के नए वीसी राजेश कुमार पांडेय सोमवार को कार्यभार ग्रहण करेंगे। यहां के वीसी साहब सिंह का तबादला अपर आयुक्त चित्रकूट धाम बांदा कर दिया गया है जबकि विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन राजेश कुमार पांडेय को यहां वीसी बनाकर भेजा गया है।