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बकरी की आवाज बताती थी दुश्मन की आहट, पहले दिन गंवाई 11 जान

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मेरठ। कारगिल युद्ध में सात जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने विजय पताका फहराई थी। दुर्गम रास्ते और परिस्थितियों में अदम्य साहस और समझदारी से सेना ने दुश्मन को पीछे धकेल दिया था। ऑपरेशन विजय में 17 गढ़वाली बटालियन को बटालिक सेक्टर को फतह करने का लक्ष्य दिया गया था। जिसे बटालियन ने सात जुलाई को हासिल कर लिया। शुक्रवार को बटालियन ने 14वां बटालिक दिवस मनाया। इस अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिकों ने अपने अनुभव साझा किए। वीर नारियों का सम्मान किया गया।
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बेजुबान जानवर काम आए
पूर्व कैप्टन केएस चौधरी का पाकिस्तानी सैनिकों के साथ आमने-सामने का पाला रहा। पुंछ रजौरी में तैनाती के दौरान पाक की पानी की पाइपलाइन तोड़ी। दुश्मन सामने होता था। पाने भरने के लिए सुबह 9 से 11 बजे का वक्त तय था। पाकिस्तानी सैनिक उससे पहले ही आ जाते थे। फायरिंग और झड़प आम बात थी। दोनों मुल्क की फौज की टुकड़ी आमने-सामने घात लगाए थी। बीच में बकरियों का झुंड था। बकरियों की आवाज से दुश्मन की आहट का पता चल जाता था। बेजुबान जानवर जंग में काफी काम आए।

पलटन की बीड़ी छुड़ाई
17 गढ़वाली बटालियन के पहले कमांडिंग ऑफिसर रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल केटीएस शर्मा के मुताबिक बटालियन एक मई 1982 को बनी। अलग-अलग टुकड़ियों से मिले फौजियों से बटालियन तैयार की गई। शुरू में बटालियन का काम मार्च करने का था। 20 किमी से मार्च की शुरुआत हुई। तब जवान बीड़ी बहुत पीते थे। इसका नुकसान यह था कि खांसी होने की वजह से पलटन के मूवमेंट का पता चल जाता था। जवानों की बीड़ी छुड़ा दी तो पलटन आने और जाने की किसी को खबर ही नहीं लगती थी। असम के लोकल प्रशासन में पलटन ने मदद की। भूटान आर्मी को ट्रेनिंग देने के लिए दो बार बटालियन वहां गई।
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जिस्म में तीन गोली लेकर घूम रहे
रिटायर सूबेदार नरेंद्र सिंह की यादें रोंगटे खड़े कर देती हैं। बटालियन का सिर उन्होंने गर्व से ऊंचा किया है। ऑपरेशन पराक्रम में भी कारगिल जैसा माहौल था। आमने-सामने की फायरिंग में मिसाइल से दुश्मनों के कई बंकर सूबेदार नरेंद्र सिंह ने उड़ाए। केरन सेक्टर की तैनाती ऑपरेशन पराक्रम में काम आई। इस दरमियान उनको छह गोली लगीं। एंबुलेंस तक पहुंचने में 12 घंटे लगे। तीन गोली अब भी उनके शरीर में हैं।

पहले दिन गंवाईं 12 जान
कारगिल की जंग में सूबेदार आनंद सिंह ने डटकर सामना किया। 31 मई को वह पिथौरागढ़ में थे। सूचना मिलते ही बटालियन रवाना हो गई। तब वह 70 ब्रिगेड में थे। बटालिक सेक्टर के काला पत्थर क्षेत्र में लड़ रहे थे। सूबेदार आनंद के मुताबिक जंग के पहले दिन 29 जून को एक अफसर और 11 जवान शहीद हो गए थे। बटालियन ने इसका करारा जवाब दिया। दो अधिकारी, जेसीओ और 28 जवान घायल हुए थे।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि
मेरठ में तैनात 17 गढ़वाली बटालियन ने शुक्रवार सुबह क्वार्टर गार्ड में अपने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सबसे आखिर में बटालियन के पहले कमांडिंग ऑफिसर रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल केटीएस शर्मा ने पुष्प चक्र अर्पित किया। देहरादून से आए ब्रिगेडियर संजय पुरी (विशिष्ट सेवा मेडल) और बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल केदार अराध्ये ने भी श्रद्धांजलि दी। सैनिक सम्मेलन में जवानों का उत्साह बढ़ाया गया। शाम को बड़ा खाना का कार्यक्रम हुआ।
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