रैपिड रेल के लिए सरकारी जमीन लेने की बाधा दूर
मेरठ/गाजियाबाद। सराय काले खां से मेरठ तक बनने वाले 82 किमी के रैपिड ट्रेन रूट निर्माण को लेकर सरकारी जमीन पर कब्जे की बाधा दूर हो गई है। सोमवार को लखनऊ में मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकारी जमीन पर तत्काल कब्जा देने को लेकर सहमति बनी। सभी सरकारी संबंधित विभागों से एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन) के पक्ष में जमीन हस्तांतरित करने की कागजी प्रक्रिया अलग से चलती रहेगी। उससे पहले सभी विभाग बिना देरी रूट व स्टेशन निर्माण के लिए चिह्नित जमीन पर कब्जा दे दें, जिससे तत्काल रूट निर्माण शुरू हो सके।
जमीन पर कब्जा देने के साथ ही एनसीआरटीसी को काम करने का अधिकार (राइट टू वर्क) भी दे दिया गया। प्रोजेक्ट में जा रही सरकार जमीन के बदले किन-किन विभागों को कितना पैसा दिया जाना है, इसका निर्धारण प्रमुख सचिव आवास सभी विभागों के साथ समन्वय कर करेंगे। प्रदेश सरकार की तरफ से आवास विकास विभाग पूरे प्रोजेक्ट का नोडल है, जिसके चलते उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है। प्रमुख सचिव आवास गाजियाबाद और मेरठ में रैपिड ट्रेन रूट निर्माण में जा रही सरकारी जमीन का विभाग वार आकलन कराएंगे। उसके बाद विभागों की तरफ से मांगी जा रही कीमत पर रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिस पर दोनों जिलों के जिला प्रशासन से भी राय लेंगे। इसके बाद उचित मूल्य का निर्धारण कर प्रस्ताव अलग से मुख्य सचिव के सामने रखेंगे। जहां से कीमतों का निर्धारण होने के बाद विभागों को जमीन के बदले धनराशि का आवंटन किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव ने दुहाई में डिपो निर्माण को लेकर निजी जमीन खरीद प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने को कहा। इस पर गाजियाबाद जिला प्रशासन की तरफ से जानकारी दी गई कि जमीन चिह्नित कर ली गई है। गांव वार जमीन की कीमतों का निर्धारण कर मंडलायुक्त की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही जमीन खरीद प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
इन विभागों को जा रही सबसे ज्यादा जमीन
गाजियाबाद में सबसे ज्यादा जमीन सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, आवास विकास परिषद, जीडीए और पर्र्यटन विभाग की जा रही है। साहिबाबाद क्षेत्र में सबसे ज्यादा जमीन आवास विकास, नगर निगम और जीडीए की है। वहीं हिंडन के आसपास सिंचाई विभाग है। उसके बाद मेरठ तिराहे पर पर्यटन विभाग के हिंडन मोटल की जमीन चिह्नित की गई है। उसके बाद दिल्ली-मेरठ रोड की जमीन पीडब्ल्यूडी, सिंचाई व वन विभाग की है। मेरठ में सबसे ज्यादा जमीन सिंचाई, वन विभाग, नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण की है। दोनों ही जिलों में सड़क व उसके किनारे की जमीन खाली पड़ी है, जिस पर एनसीआरटीसी तत्काल कब्जा लेकर काम शुरू कर सकेगी।
वर्जन
बैठक में बड़ा फैसला तत्काल सरकारी विभागों की चिह्नित जमीन पर कब्जा देने का हुआ है। साथ ही एनसीआरटीसी को तत्काल निर्माण शुरू करने का अधिकार भी मुख्य सचिव की तरफ से दे दिया गया है। अब जमीन हस्तांतरण की कागजी प्रक्रिया शुरू हुए बिना रैपिड ट्रेन रूट का निर्माण शुरू हो सकेगा। - रितु माहेश्वरी, जिलाधिकारी (गाजियाबाद)
सात मई को रैपिड के प्री-निर्माण का टेंडर
मेरठ। अब एनसीआरटीसी तेज गति से कार्य शुरू कर देगा। एक महीने पहले टेंडरों को वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। मई में रैपिड रेल के लिए प्री-टेंडर, डिजाइन, प्लानिंग आदि के लिए तीन-चार टेंडर निकाले जाने हैं। सात मई को निकाले जाने वाले टेंडर में सरायकाले खां से साहिबाबाद तक किए जाने वाले प्री-निर्माण टेंडर के लिए बोली लगाई जाएगी। इसके बाद पहले चरण में होने वाले 16.5 किलोमीटर के निर्माण के चलते कार्य जून में किया जाना संभावित है। इस पहले चरण के लिए सड़क चौड़ीकरण और बिजली की लाइनों को हटाने का कार्य किया जा चुका है।
इन टेंडरों की लगेंगी बोली
सात मई - सिविल कार्य के लिए सराय काले खां और साहिबाबाद के बीच प्री-निर्माण का टेंडर
आठ मई - रैपिड रेल की प्लानिंग और उस पर किए जाने वाले कार्य के लिए कंसल्टेंसी के लिए टेंडर
16 मई - रैपिड रेल के स्टेशनों की डिजाइनिंग और निर्माण के लिए टेंडर
स्टेशनों के लिए जमीन की आवश्यकता (वर्गमीटर में)
मोदीपुरम - 8222.20
मेरठ नार्थ - 7426.90
डोरली - 2827.14
एमईएस कालोनी - 2611.15
बेगमपुल - 7006.40
भैंसाली - 3690.35
मेरठ सेंट्रल - 5755.00
ब्रह्मपुरी - 5237.57
शताब्दीनगर - 12296.10
रिठानी - 2270.20
परतापुर - 1820.84
मेरठ साउथ - 10436.60
रैंप के लिए जमीन चाहिए (वर्गमीटर में)
परतापुर स्टेशन के पास - 4748.00
शताब्दीनगर - 5651.57
एमईएस कालोनी - 5968.07
मेरठ साउथ - 4000