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शिफ्ट किए गए पेड़ों में फूटने लगीं कोपलें

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शिफ्ट किए गए पेड़ों में फूटने लगीं कोपलें
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- मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस वे पर सौ से ज्यादा बड़े पेड़ों को किया गया था शिफ्ट
- बीच एलाइनमेंट से उखाड़कर हाईवे के किनारे लगाए गए थे, कुछ पेड़ सूखे
- एनएचएआई अधिकारी खुश, मान रहे बेहद सफल रहा प्रयोग
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस वे निर्माण के आड़े आ रहे जिन विशाल पेड़ों को शिफ्ट किया गया था, उनमें से कई पेड़ों में नई पत्तियां निकलनी शुरू हो गई हैं। इससे एनएचएआई की टीम बेहद उत्साहित है। इस प्रयोग को सफल मानते हुए टीम आगे भी इस पर काम करने की योजना तैयार कर रही है।
मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस वे निर्माण का कार्य चल रहा है। इसके बीच एलाइनमेंट में आम, पीपल, नीम आदि के कई विशाल पेड़ आ रहे थे। इस बार एनएचएआई टीम ने निर्णय लिया था कि अधिकतर पेड़ों को काटा नहीं जाएगा। इन्हें पहले छांटा जाएगा और फिर जड़ से उखाड़कर शिफ्ट किया जाएगा। पेड़ों को न काटने का कारण हरियाली को बचाना था। बारिश के मौसम में टीम ने सौ से ज्यादा बड़े पेड़ों को मशीनों के जरिए शिफ्ट किया। पेड़ों को निर्माणाधीन एक्सप्रेस वे के किनारे ही लगाया गया।
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इस तरह किया प्रयोग
एक-एक मीटर व्यास में पहले पेड़ों की जड़ों में केमिकल डाला गया। उसके बाद मशीनों के जरिए पेड़ को उठाया गया। फिर दूसरी जगह लगाया गया। एक मीटर व्यास में लगभग आठ हजार रुपये और दो मीटर के व्यास में पेड़ को उखाड़ने में औसत खर्च 12 हजार रुपये था, लेकिन इससे कम खर्च आया।
वजन किया गया था कम
आम, कटहल, नीम आदि के पेड़ों की पहले खूब छंटाई की गई। हालांकि कुछ पेड़ों को ज्यादा ही छांट दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊपर से तो पेड़ डेवलप हो जाएगा। यदि वजन ज्यादा हुआ तो शिफ्ट करने में दिक्कत आएगी। कम वजन के बाद ही पेड़ लगाए गए।
आने लगे परिणाम
एक्सप्रेस वे के किनारे शिफ्ट कर लगाए गए पेड़ों पर अब सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। नई पत्तियां निकलने से यह बात साफ हो गई कि पेड़ों की जड़ों ने मिट्टी पकड़ ली है। पेड़ अब पूरी तरह से यहीं पर विकसित हो जाएंगे। इससे एनएचएआई अधिकारी खुश हैं।
अन्य काम भी हुए तेज
एक्सप्रेस वे में अन्य काम भी तेज हुए हैं। इंटरचेंज तथा आरओबी पर चल रहे कामों को नई गति दी जा रही है। दरअसल होली के बाद काम ठंडा पड़ गया था। अब फिर से टीमें लगाकर काम में तेजी लाई गई है।
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वर्जन
पेड़ों को शिफ्ट करने का प्रयोग सफल रहा है। उनमें नई पत्तियां आनी शुरू हो गई हैं। यह अच्छा प्रयोग था, जो आगे भी जारी रखा जा सकता है। -अरविंद कुमार मैनेजर एनएचएआई
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