प्रदेश भर में अपना जाल फैला रखा था राकेश ने
बिजनौर। टीईटी में फर्जी पेपर बेचते दबोचे गए राकेश ने दो साल पहले शेरकोट में सरस्वती दुर्गा महाविद्यालय खोला था और वह बड़ी परीक्षाओं से लेकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम का भी वह ठेका लेता था। इस काम के लिए उसने अपने गुर्गे छोड़ रखे थे। यह गुर्गे ही उसके पास नौकरी लगवाने वालों के अलावा बड़ी परीक्षा के पेपर देने के लिए आते थे। एसटीएफ उसके नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र के गांव नारायणपुर छंगा निवासी राकेश शेरकोट में स्थित सरस्वती दुर्गा महाविद्यालय का प्रबंधक है। कॉलेज की आड़ में वह बड़ी परीक्षाओं के फर्जी पेपर बनाने का खेल खेल रहा था। एक लाख रुपये में पेपर बेचता था। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश भर में उसने अपना जाल फैला रखा था। उसके गुर्गे इस काम में सक्रिय थे। फर्जी पेपर बनाने के साथ सरकारी नौकरी दिलाने के भी ठेके लेता था। धामपुर तहसील में तो इस काम के लिए उसे सब जानते थे। टीईटी के दौरान राकेश एसटीएफ के रडार पर आया था। परीक्षा से पहले ही एसटीएफ ने उसे दबोचने का ताना बाना बुन लिया था। राकेश को नहीं मालूम था कि उसके पीछे एसटीएफ लगी है। अभ्यर्थियों को भरोसा दिला रहा था कि उसके पास जो पेपर है वह असली है। एक लाख रुपये लेकर एक अभ्यर्थी को वह पेपर बेच चुका था और बाकी पेपर बेचने की तैयारी चल रही थी। तभी एसटीएफ ने उसे दबोच लिया। इस काम में राकेश के साथ कई और लोग जुड़े थे।
सॉल्वर न मिलने पर पर्चियां बांटकर चलाया नेटवर्क
धामपुर। सूत्रों का कहना है कि जब नेटवर्क के संचालकों को सॉल्वर बैठाने का कोई रास्ता नहीं मिला तो मुन्ना भाइयों ने स्कूल-कॉलेज प्रबंधन से सांठ गांठ कर अभ्यर्थियों तक पर्ची पहुंचाने का काम किया। इन पर्चियों में 80 से 85 प्रतिशत तक प्रश्नों को सॉल्व किया गया था। जिले में ही नहीं बल्कि सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद व मुरादाबाद में भी किया गया।
कोचिंग सेंटर संचालकों की खंगाली जा रही कुंडली
धामपुर। टीईटी में पूरी तैयारी के बाद सेंधमारी करने वाले सॉल्वरों का नेटवर्क शेरकोट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी तहसील क्षेत्र में जाल बिछा रखा है। कुछ कोचिंग सेंटर संचालकों के नाम भी इसमें सामने आ रहे हैं, जिनकी कुंडल खंगाली जा रही है।
इनका नेटवर्क अभ्याथियों से ग्रुप सी, ग्रुप बी, ग्रुप डी की नौकरियों दिलाने के झांसे में लेकर मोटी रकम वसूलते हैं। परीक्षा को प्रभावित करने वाले इस नेटवर्क के तार शेरकोट, स्योहारा, धामपुर, नूरपुर, नहटौर से जुड़े हुए हैं। इस नेटवर्क का संचालन शेरकोट से ही किया जा रहा था। पूरे तहसील क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा मुन्नाभाइयों के नाम सामने आने लगे हैं। परीक्षा होने से पहले ही यह नेटवर्क अपने बिचौलियों को सक्रिय कर देता है। नेटवर्क के संचालक ही अभ्यर्थियों से वह परीक्षा केंद्र भरवाते थे, जहां उनकी पकड़ मजबूत होती है। परीक्षा देने वाले सूत्रों का कहना है कि नेटवर्क का संचालन करने वाले अभ्यर्थियों से 10-12 लाख रूपये वसूल लेते हैं। सीओ महावीर सिंह का कहना है कि पुलिस जांच में जुटी है। विशेषकर कोचिंग सेंटरों का संचालन करने वालों की कुंडली खगाली जा रही है। यदि पुलिया जांच में कहीं भी दोषी पाया जाएगा तो ऐसे सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होगी। संज्ञान में लाया गया है कि तहसील क्षेत्र के नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार का गोरखधंधा करने वालों का जाल बिछा है। जो सीधे भले लोगों को परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते हैं।