हिंडन को निर्मल करने पर मंथन
मेरठ। निर्मल हिंडन कार्यक्रम का विजन डाक्यूमेंट बनाने के लिए आयोजित समन्वय में कहा गया कि हिंडन को निर्मल करने के लिए पांच मूल बिंदुओं पर काम करना होगा। पूरी योजना के साथ इसके संबंधित विभागों के लोग शिरकत करेंगे।
शुक्रवार को अपरायुक्त रजनीश राय की अध्यक्षता में उन्हीं के कार्यालय में आयोजित बैठक में विजन डाक्यूमेंट समिति के सदस्यों रमन त्यागी, उमर सैफ, वीना खंडूरी व एना सहित जल निगम, कृषि विभाग तथा पंचायती राज विभाग के संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। दरअसल सितंबर के प्रथम सप्ताह में मंडालायुक्त अनीता सी. मेश्राम द्वारा बलाई गई बैठक में विजन डाक्यूमेंट समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इस समिति को हिंडन व उसकी सहायक नदियों के सुधार की त्वरित योजना बनानी है। योजना बनाने में निर्मल हिंडन कार्यक्रम के पांच मूल बिंदुओं तालाब संरक्षण, रयासनमुक्त कृषि, जन-जागरूकता, पौधरोपण व कूड़ा निस्तारण को ध्यान में रखकर ही योजना बनानी है। हिंडन व उसकी सहायक नदियों के किनारे के गांवों में सरकारी योजनाओं को समन्वय के साथ कैसे लागू किया जाए इसको केंद्र बिंदु रखना है।
सात जिलों का रहेगासहयोग
इन सब कार्यों में सभी सात जनपदों के सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाना है। बैठक में सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। नदी किनारे के गांवों में शामली जनपद में हुए कार्यों का आधार बनाकर अन्य सभी 6 जनपदों में उन कार्यों की पुनरावृत्ति करनी है। सभी जनपदों में मुख्य विकास अधिकारी को इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त भी किया गया है। इस डाक्यूमेंट में राष्ट्रीय हरित पंचाट के आदेशों को भी ध्यान में रखा जाएगा, जो आदेश दिए गए हैं उनके सभी कार्यों को सम्मिलित किया जाएगा। प्राथमिक तौर पर नदी किनारे के गांवों में तालाबों का निर्माण व रसायनमुक्त कृषि के लिए कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
काली नदी भी होगी मनरेगा में शामिल
नीर फांडेशन द्वारा काली नदी पर अध्ययन के आधार पर उसको उत्तर प्रदेश सरकार की मनरेगा योजना के अंतर्गत लाने की मांग उठाई थी। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई मंत्री को लखनऊ में जाकर 10 सितंबर को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर मंत्री से यह भी आग्रह किया गया है कि यह गंगा की प्रमुख सहायक नदी है अत: इसको राज्य की मनरेगा योजना में शामिल कर लिया जाएग। इसी के साथ हिंडन नदी की भी मांग उठाई गई थी। गौरतलब है कि मनरेगा योजना के तहत उत्तर प्रदेश द्वारा आठ नदियां गोमती, अरिल, सोत, सई, मनोरमा, तामस, आमी व वरुणा नदियों को पहलेे ही मनरेगा योजना में शामिल किया जा चुका है। जिन नदियों को मनरेगा योजना में शामिल किया गया है उनमें नदी सुधार का कार्य मनरेगा के मजदूरों व उसके पैसे से किया जाएगा। यह कार्य प्रारंभ भी किया जा चुका है। अब सिंचाई मंत्री का एक पत्र संगठन को प्राप्त हुआ है जिसमें कि मनरेगा योजना के तहत काली नदी को शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की दी गई है।