मेरठ। आउट सोर्सिंग पर शहर की सफाई में सरकारी खजाने की खूब बंदरबांट हुई। न तो सफाई कर्मियों को ही उनका अधिकार मिल पाया और न ही शहर स्वच्छ हो सका। नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से दो साल तक चले इस खेल पर अब ब्रेक लगने वाला है। सोमवार को अलकनंदा कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
नगर निगम ने 2015 में अलकनंदा कंपनी को आउट सोर्सिंग पर 2215 सफाई कर्मियों की आपूर्ति का ठेका दिया था। टेंडर प्रक्रिया की शर्तों के मुताबिक ठेका एक साल के लिए था, लेकिन तत्कालीन नगरायुक्तों और नगर स्वास्थ्य अधिकारी की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर ठेके को दो साल तक चलवा दिया। इस दौरान सरकारी खजाने की खूब लूट हुई। नगर निगम की बोर्ड बैठक औन अन्य प्लेटफार्मों पर भी सफाई के नाम पर हो रही धन की बंदरबांट को लेकर शोर शराबा होता रहा, लेकिन शासन और प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। दो माह पहले अमर उजाला ने अभियान के तहत पूरे प्रकरण का पर्दाफाश किया। इसके बाद कमिश्नर ने पूरे प्रकरण पर जांच बैठा दी। जांच अब अंतिम रूप में है। बता दें कि अलकनंदा के मालिक ने सभी सफाई कर्मियों के न तो ईपीएफ जमा किया और न ही ईएसआई का भुगतान किया। इसको लेकर पार्षदों ने बोर्ड बैठक में निगम अधिकारियों को कई बार घेरा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान का कहना है कि तीन दिन की चेतावनी का समय पूरा हो चुका है। सोमवार को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही कंपनी की जमा जमानत राशि भी जब्त होगी।