ऐतिहासिक कॉलेज में बदतर हैं टॉयलेट
मेरठ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां पूरे देश में टॉयलेट बनवाने पर जोर दे रहे हैं वहीं, शिक्षण संस्थानों में टॉयलेट का बुरा हाल है। गर्ल्स कॉलेजों में तो स्थिति फिर भी सामान्य है, लेकिन कोएड कॉलेजों में हालात खराब हैं। ऐतिहासिक मेरठ कॉलेज में भी टॉयलेट के इंतजाम पूरे नहीं है। अधिकांश जगह या तो टॉयलेट गंदगी से अटे पड़े हैं या फिर जहां ठीक भी हैं, वहां ताले लटके हैं।
सन् 1892 में बना मेरठ कॉलेज स्थापना के 125 वर्ष पूरे करने वाला है। देश को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं के अलावा तमाम बड़ी हस्तियां देने वाले इस कॉलेज में 10 हजार के करीब छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें छात्राओं की संख्या करीब पांच हजार है। कॉलेज की हैरिटेज बिल्डिंग को लेकर सांसद राजेंद्र अग्रवाल तक संसद में आवाज उठाकर केंद्र सरकार से इस धरोहर के संरक्षण और विकास हेतु उचित कदम उठाने की बात कर चुके हैं। छात्र और क्षेत्रफल के हिसाब से वेस्ट यूपी के सबसे बड़े कॉलेज में पिछले काफी दिनों से छात्राएं टॉयलेट को लेकर आवाज उठाती आ रही हैं। उनका कहना है कि शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है। मंगल पांडे हॉल के सामने बने टॉयलेट भी ठीक नहीं थे। एलएलबी विभाग में जहां हालत ठीक थी वहां ताला लटका था। दूसरी कई जगहों पर भी टॉयलेट की स्थिति बदतर दिखी।
...तो छात्राएं दाखिला लेना बंद कर देंगी
एबीवीपी की विभाग छात्रा प्रमुख शिखा शर्मा का कहना है कि हम जल्द ही सभी कॉलेजों में छात्राओं के टॉयलेट की स्थिति चेक कराएंगे। सभी प्राचार्यों को ज्ञापन देंगे। मेरठ कॉलेज की पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष सोनम सिरोही का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं की इस समस्या के बारे में कभी नहीं सोचा। कॉलेज की छात्र संघ उपाध्यक्ष शालिनी का कहना है कि कॉलेजों में छात्राओं की सुविधाओं को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहा। ऐसा ही रहा तो कोएड कॉलेजों में छात्राएं दाखिले लेना बंद कर देंगी। एमए की छात्रा ईशा, बीएससी की छात्रा शीतल, एमए की छात्रा पूजा ने बताया कि छात्राओं को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वे कॉलेजों में नहीं दी जा रही।
ये कैसा स्वच्छ भारत मिशन
एक तरफ पूरे देश में टॉयलेट और सफाई को लेकर स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है। लोग जगह-जगह टॉयलेट बना रहे हैं। वहीं, कोएड कॉलेजों में लड़कियों के टॉयलेट ठीक नहीं हैं, ऐसे में ये बड़ा सवाल है कि कैसे तस्वीर सुधरेगी। अकेले मेरठ कॉलेज में ये हालात नहीं हैं। दूसरे कॉलेजों में भी गर्ल्स टॉयलेट की हालत ठीक नहीं है। ये हाल तब है जब कॉलेज में जल्द ही नैक टीम का निरीक्षण होने जा रहा है।
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ठीक है टॉयलेट
कॉलेज के प्रवक्ता विनय बरसर का कहना है कि लॉ विभाग में ताले की उन्हें जानकारी नहीं है। लेकिन लाइब्रेरी के पास पिछले साल ही टॉयलेट बनवाए गए थे, वे ठीक हैं। मंगल पांडे हॉल के पीछे वाले टॉयलेट बंद हैं। इसके अलावा भूगोल विभाग में भी टॉयलेट ठीक हैं। इससे पहले प्राचार्या बी. कुमार से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।
खास खबरें
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