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दावेदारी को बन रहे भाजपाई

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मेरठ। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अब निकाय चुनाव पर सबकी नजर लगी है। ऐसे में जो लोग विधानसभा चुनाव में दूसरे दलों के लिए काम करते रहे, अब निकाय चुनाव में भाजपाई रंग में रंग कर दावेदारी करते नजर आ रहे हैं। अहम बात ये है कि कुछ भाजपा नेताओं ने भी इन्हें आश्वासन दिया है, जिससे पुराने भाजपाई परेशान हैं।
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निकाय चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। क्योंकि पंचायत चुनाव में जहां भाजपा को कभी बड़ी सफलता नहीं मिली तो निकाय चुनाव में भाजपा हमेशा सफल होती रही है। प्रदेश की अधिकांश नगर निगम में तो भाजपा के ही महापौर निर्वाचित होते रहे हैं। जबकि नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी भाजपा जीत हासिल करती रही है। इस बार लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले निकाय चुनाव पर भाजपा का पूरी तरह फोकस है। इसमें निगम चुनाव तो भाजपा के लिए आसान हैं, क्योंकि भाजपा का कैडर वोट महानगर में बसता है। लेकिन नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत में जातीय आंकड़ों के बीच जीत का गणित हासिल करना आसान नहीं है। लेकिन केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण भाजपा इस बार निकाय चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद संजोय है।
भाजपाइयों कीइस उम्मीद को इस बात से भी बल मिल रहा है कि तमाम ऐसे नेता और कार्यकर्ता जो विधानसभा चुनाव में सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद के लिए काम कर रहे थे, वह अब भाजपाई रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। महानगर में पार्षद पद के दावेदारों में कई ऐसे लोग जुटे हैं, जो विधानसभा चुनाव में भाजपा के विरोध में काम कर रहे थे, लेकिन अब पार्टी के ही पदाधिकारियों और विधायकों के आसपास परिक्रमा कर दावेदारी को मजबूत कर रहे हैं। ऐसा ही देहात क्षेत्र में भी हो रहा है। नगर पालिका हो या नगर पंचायत तमाम दावेदार ऐसे खड़े हो गए हैं, जो गैर भाजपाई हैं। ये भाजपा के कार्यक्रमों में खर्च करने के साथ ही भीड़ ले जाकर दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं। इसको लेकर पुराने भाजपाइयों में रोष पनपने लगा है।
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जिला पंचायत चुनाव में हुआ था खेल
जिला पंचायत चुनाव में इसी तरह का खेल हुआ था। जिन लोगों का भाजपा से कोई नाता नहीं रहा, उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था। इनमें सुरभि चौधरी, विश्वराज विशु, राकेश त्यागी, मोनिका भाटी और मंजूबाला सहित कई नाम ऐसे हैं। यही नहीं विश्वराज विशु को छोड़ दें तो बाकी कोई इस समय भाजपा में सक्रिय भी नजर नहीं आ रहा है।

निकाय चुनाव में पूरी समीक्षा के बाद ही प्रत्याशी तय होंगे। किसी भी पुराने और समर्पित कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होगी। - अरुण वशिष्ठ, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष भाजपा
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खास बात
निकाय चुनाव में नगर पालिका और नगर पंचायतों में ठोक रहे दावा
गैर भाजपाइयों की सक्रियता और दावेदारी से पुराने भाजपाई परेशान
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